आज का प्यार
तुम्हें इंतजार था कि कोई आए
तुम्हारे जीवन में प्यार लेकर और
तुम भी किसी के होकर जियो
या शायद तुम भी चाहते थे कि
हो जाए कोई सिर्फ तुम्हारा
हो गया ऐसा ही
जैसा चाहा तुमने बिलकुल वैसा ही
करते रहते मेरा इंतजार
बार बार करते मुझसे बातें हजार
भेजते कभी फोटो
कभी मेरी रचनाओं में सुधार
हर वक्त यूं रहते झुके जैसे
आसमां झुका रहता है धरती पर
फिर ढूंढते रहते मिलने के बहाने
कितना जताते प्यार
मानों कर दोगे तुम अपना सब कुछ निसार
तुम्हें कही कुछ और नजर नहीं आता था
सिर्फ मैं ही मैं और कोई नहीं
लेकिन तुम्हें शायद मेरी खुशियाँ रास नहीं आई
कहाँ अच्छा लगता होगा तुम्हें मेरा मुसकुराना
तभी खेल कर दिया तुमने शुरू
खेलने लगे खेल झूठे दिखाबे के
झूठ कहाँ छिपता है लेकिन
सब हो जाता है सरे आम
सिर्फ आँसू ही आँसू भर दिये मेरे मन में
जीवन में
खो दी मेरी सारी खुशियाँ
दर्द दुख तड़प
बस और कुछ नहीं
अब मत करना बात
सब सुनेगे
अब मत करना मेसेज
सब देख लेंगे
हे ईश्वर इतने बहाने
इतने झूठ
तुम उससे कर रहे थे जो
सच है तन मन और धन से
कभी अपनी परवाह नहीं की
कभी अपने बारे में नहीं सोचा
सिर्फ तुम और तुम ही
सबसे आगे सबसे पहले
और उसका यह सिला दिया
यह तकलीफ
आखिर मैं मर क्यों नहीं गयी तेरा सच जान कर
सुन कर
क्या तू ऐसा है क्या तुझे ऐसा समझा था
तुझे कुछ अहसास कहाँ होता होगा
कि कोई कैसे जी रहा है
तुम्हें अपनी इज्जत बहुत प्यारी थी
क्या यही है तुम्हारी इज्जत
क्या तुम ऐसे हो
मैं शर्मिंदा हूँ
बेहद शर्मिंदा
हे ईश्वर यह सब देखने सुनने से पहले
मैं मर क्यों नहीं गयी कैसे रही मैं जीवित
क्या थे तुम और क्या हो गये
और अभी भी नहीं चेते
अभी भी वही गंदी सोच
तुम्हारी यही मुझे जीने नहीं दे रही
हाँ नहीं जीने दे रही
देखना एक दिन तुम मुझे खो दोगे
आखिर कब तक मैं निभाती रहूँ
कब तक मैं सब अकेले संभालती रहूँ
क्या तुम्हारा कोई फर्ज़ नहीं
क्या तुम्हें मेरे दर्द से कोई वास्ता नहीं
बोलो क्या यह मेरा दर्द सिर्फ मेरा है
तुम क्यों नहीं मुझे उबार लेते
क्यों डुबाये जा रहे हो
गहरे गहरे और भी गहरे
जहां मुझे घुटन होती है
दम घुटता है
बेचैन हो जाती हूँ
और बिन पानी की मछली सा तड़प उठती हूँ
क्या येसा ही होता है प्यार
क्या यही आज का सच
हकीकत और प्रेम
ओहह ईश्वर
क्या है यह सब
बता दो न मुझे
कि मेरे मन में लगी हुई बहुत मोटी गांठ
कुछ तो पतली हो जाये
कुछ तो हल्की हो जाये
और मिले मेरे मन को थोड़ी राहत
थोड़ा सकूँ
थोड़ी खुशी और
बहते हुए आँसू थम जाएँ
हे ईश्वर मुझे बचाओ
मुझे इस मझधार से निकालो
मेरे मन के बोझ कम करो
कम करो मेरी बेचैनी
करो कुछ मेरे ईश्वर
कुछ तो करो
जल्दी करो ......सीमा असीम
8,2,20



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