सुनो मेरा दिल पुकारता है तुम्हें,  आवाजें लगता है बार बार कभी ज़ोर ज़ोर से और कभी हल्के से ,,,क्या तुम्हें सुनाई नहीं देती यह आवाजें जो मेरे दिल से निकलती हैं ! मुझे पता है कि वे सीधे तुम्हारे दिल तक ही जाती होंगी लेकिन तुम उस आवाज को अपने दिल में ही छुपा लेते हो ! नहीं जानती क्यों ? शायद तुम डर जाते हो जैसे मैं घबरा जाती हूँ ,,,हैं न क्योंकि हमारा डर हमें जीने नहीं देता ! हम औरों से नहीं बल्कि अपने आप से ही डरते हैं ,,,, हम सही हैं या गलत इसका फैसला खुद न करके दुनिया और समाज पर छोड़ देते हैं ...
दिल कितना खुश होता है पर किसी और के बारे में सोच कर उदास हो जाता है !
चेहरे पर खुशी आ जाती है दिल सकूँ से भर जाता है जब जब आता याद कि तुम कैसे कह देते हो बार बार ,,आई लव यू ,,,शर्म से झुक जाता है और गाल हो जाते हैं सुर्ख लाल ,,
वो बातें वो यादें , वो लमहें ,,सुखद और खुशहाल , काफी हैं जीवन को जीने के लिए .....
तुम मत पुकारना मुझे बस याद करते रहना
मैं मन ही मन तुम्हें मनका सा रटूँगी !

सीमा असीम
14, 2,20 

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