सच कहूँ तो आज मन खुश है न जाने कितने दिनों के बाद मैं खुश होना चाहती हूँ अपनी आत्मा से सुखी हूँ आज आँसू नहीं हैं दुख नहीं है कोई शिकवा नहीं है शिकायत नहीं है अगर कुछ है तो खुशी है सुख है और मुस्कान है क्योंकि तुम मुझे हर हाल में संभाल लेते हो मुझे उबार लेते हो मेरे बचपने को अपनी समझदारी से सब ठीक कर लेते हो ,,, तुम कितने प्यारे हो न , कितने अच्छे ,,,हैं न ,,, इस दुनिया के सबसे प्यारे इंसान ,,तभी तो मैं तुम्हें मानती हूँ तुमसे सब कुछ कह कर हल्की हो जाती हूँ मैं तुम्हारी एक एक धड़कन को समझती हूँ वैसे ही तुम भी सब समझते हो मैं कह देती हूँ और तुम कहते नहीं हो लेकिन आज यह प्रूव हो गया कि तुम मुझे इतना प्रेम करते हो जितना इस दुनिया में कोई अपनी जान को करता है या मरते समय जीवन को करता है जिंदगी को करता है और मैं पागल सी यह समझती ही नहीं जानती ही नहीं ,,,,,क्योंकि मैं अपने मन को समझा नहीं पाती हूँ खुद से ही सवाल करती हूँ और खुद से ही जवाब बना लेती हूँ ,,बस यही कारण है और कुछ नहीं है जैसे मैं दर्द को झेलती हूँ ठीक वैसे ही दर्द से तुम भी गुजरते हो मेरा उतना ही इंतजार करते हो जितना मैं करती हूँ ,,,,,,,सच कहूँ तो तुम मुझसे ज्यादा अच्छे हो और मैं अपनी आँखों पर न जाने कौन सी पट्टी चढा कर बैठ गयी थी आज मुझे पता चला कि शक प्रेम को खत्म करता है मार देता है प्रेम को और मैं मूर्ख तुम पर शक कर बैठी ,,,,मैं ही गलत हूँ सारी गलती मेरी है तुम सच में बहुत प्यारे हो क्योंकि तुम हमारे हो ,,,,सिर्फ मेरे ....
सीमा असीम
11,2,20
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