तुम मेरे मन में शोर मचाते हो
चीखते हो
चिल्लाते हो
घमासान सा मचा देते हो
भीतर से पिघलाते हो
और आँखों से वाष्प बन कर बहा देते हो
इतना बेचैनी से भर देते हो
कि सारा चैन खो जाता है
सारा सकूं चला जाता है
घबरा जाती हूँ मैं
उदासियों को समेट कर अपने आसपास
उनसे लिपट कर पूरी दुनियाँ को भूल जाती हूँ
उनसे ही करके अपना शृंगार
एक बेजान जिस्म में तब्दील हो जाती हूँ
बेजान बन जाती हूँ ! !
सीमा असीम

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