कि यह प्यार है गिला नहीं 
सुनो प्रिय 
           तुम्हें देखते ही न जाने कितना प्रेम उमड़ पड़ता है जो मन में भरा होता है न उसे सब तुम्हारे ऊपर उड़ेल देने को जी चाहता है तुम यूं ही सामने बैठे रहो पल भर को भी तुमसे दूर जाने का दिल ही  नहीं करता है ,,,,लेकिन मैं तुम्हें अपनी नजरों से दिल में बसाकर एक बार फिर दूर हो जाती हूँ पर दूर जाकर भी कहाँ दूर जा पाती हूँ बल्कि और ज्यादा करीब आ जाती हूँ बेहद करीब इतना कि तुम मेरी साँसों में रहने लगते हो तभी तो तुम हो तो हम हैं अन्यथा हमारा होना कोई होना नहीं है ,,, हर पल तुम्हारी आरजू रहती है न जाने यह कैसी बेकरारी है जो न कही जाती है और न ही सही जाती है,,,तभी तो मैं रचती रहती हूँ तुम्हें ही शब्द दर शब्द,, अपनी गजल में गीत में कहानी में और कविता में यकीनन बहुत ही मुश्किल है तुम्हारे बिना जीना, रहना ,,,
प्रिय यूं ही तुम्हें चाहते रहेंगे ...मिटते रहेंगे .... प्रिय मेरी जो यह मोहब्बत है न इसकी कभी थाह लेने कि कोशिश मत करना क्योंकि यह अथाह है जितना लुटाती हूँ उतनी ही और ज्यादा उमड़ने लगती है ,,सागर कि लहरे तो फिर भी कम उछाह लेती होंगी जितना मेरा प्यार ,,, मेरी हर धड़कन तुम्हारा ही नाम लेती है ,,,आजकल न जाने क्या हुआ है जो सारी रात तुम मेरे साथ ही रहने लगे हो मैं तुम्हारी बाहों में निश्चिंत होने लगी हूँ ,,,,लबों पर मुस्कान खिल गयी है ,,,,,मैं तुम्हारे कंधे पर अपना सिर रख लेती हूँ और गुजर जाती है पूरी रात यूं ही सोते जागते ,,,,,,,आँखों की नमी मुस्कान बन गयी है जो छलकती रहती है उमड़ती रहती है .....क्यों लगते हो इतने प्यारे ? क्यों दिल में धड़कते रहते हो ? क्यों कोई तुम सा नहीं है ? 
हाँ प्रिय कोई तुम सा नहीं ...कोई इतना प्यारा नहीं ,,,कोई भी ,,,,जान हो तुम मेरी मेरे प्यारे प्रियतम तेरे होने से ही मैं हूँ हाँ प्रिय यही एक सच है मेरा ..... 
आपके प्यार में हम सबरते हैं , आप हो और हरदम नजरों के सामने हो,,,,प्रिय तुम तो मेरे दिल की उन गहराइयों में छिपे हो जहाँ से बाहर निकलना भी नामुमकिन सा  है   अब तुम चाहें दूर रहो या पास  कोई परवाह ही नहीं है मेरे प्यारे प्रियतम ,,,
आप ही हो जो मुझमें बस गए हो 
मेरे अपने मेरे प्यारे सिर्फ आप
अब तो जीना भी आपके साथ 
और मरना भी, सारे दुख सुख सांझा हो गए हैं !!
सीमा असीम


हमें हर घडी आरजू है तुम्हारी होती है कैसी सनम बेकरारी मिलेंगे जो तुमको तो बताएँगे हम बहुत प्यार करते हैं तुमको सनम हमारी ग़ज़ल है तसव्वुर तुम्हारा तुम्हारे बिना अब न जीना गवारा तुम्हें यूँ ही चाहेंगे जब तक है दम बहुत प्यार करते हैं तुमको सनम सागर की बाँहों में मौजें हैं जितनी हमको भी तुमसे मोहब्बत है उतनी के ये बेकरारी ना अब होगी कम बहुत प्यार करते हैं तुमको सनम

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