आज मैं बहुत दिनों के बाद घर से निकली ! न जाने यह क्या हुआ है मैं खुद को जी ही नहीं पाती हूँ तुम्हें ही जीती रहती हूँ और न जाने यह हो कैसे जाता है कि मुझे तुम्हारे किसी भी सुख या दुख के बारे में पता कैसे चल जाता है ! न जाने कौन सी वो अद्रश्य सी डोरी है जो मुझे हर पल तुम्हारी तरफ खींचती रहती है !तुमसे बात हुई और सारे दुख दूर भाग गए मैं मुस्करा दी और आँसू न जाने कहाँ उड गए 1 कितनी बीमार थी वो बीमारी भी फुर्र से कहीं गायब हो गयी ! 
 मेरे प्रेम के सच्चे सहचर प्रिय आज मैं तुमसे कुछ कहना चाहती हूँ ,, सुनोगे न ? वो जो मेरा प्रेम का मंदिर है न उसका मान बनाए रखना ! बस इतना ही कहना है कि उसे अपवित्र मत होने देना क्योंकि वहाँ उसकी रक्षा चारो तरफ से घेरे खड़े मेरे भाई देव उसकी पहरेदारी कर रहे हैं ! और साक्षात ईश्वर हमें आशीर्वाद देने को तत्पर हैं साथ ही माँ प्रकृति अपना आँचल बिछाए हमें सुख की सकूँ की छांव दे रही है !
सुनो नाराज मत होना ! 
मुस्करा दो न ? 
बस एक बार ज़ोर से खिलखिला कर, कि उस मुस्कान की खुशी मेरे चेहरे तक आ जाये ! 
तो मुस्कराओ ??

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