दिल की अतल गहराईयों में तुम्हें बसा लिया है
रग रग में सिर्फ़ तुम्हारा ही नाम लिख लिया है
ज़रूरत नहीं रही दुनियाँबी दिखावे की मुझे
इस तरह चाहा और तुम्हें अपना बना लिया है
मिटाया है मैनें ख़ुद को तेरी चाहत में सनम
आँखों में बस तेरा ही अक्स बसा लिया है
जाओगे भला कैसे तुम मुझसे दूर होकर
इस तरह से मन से मन को मिला लिया है ! !
सीमा असीम

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