आपका नाम ले लेकर हमने अपनी रातों को संवारा है 
कभी गुजारा है अमावस्या की रात को चाँद की राह में !!
सुनो प्रिय, 
             रात तो गुजर गयी रोशनी की एक चमक के लिए क्योंकि  अमावस्या की रात चाँद आसमा में आता ही नहीं ! न गीत रचे जाते हैं न कोई रचना बस इंतजार होता है सुबह की पहली किरण का ! सर्दियों की रातें यूं ही बहुत अधेरी और सर्द होती हैं ! 
  एक झलक चाँद की पाने भर से ही शरीर में कुछ गर्माहट का अहसास होता है ! लेकिन प्रिय आज रात भर मन बहुत ही बेचैनी से भरा रहा कि जब चाँद आसमा में नहीं आता है तो वो कितना परेशान हो जाता होगा ...हद से ज्यादा मुस्कराता होगा ......अपने गम छुपाने के लिए ........प्रिय आप जानते हो न कि तन्हाइयाँ बहुत दर्द देती हैं ...बहुत तकलीफ से भर देती है ......लेकिन उस वक्त हम यह कैसे भूल जाते हैं कि वो भी तो इतना ही उदास और तन्हा होंगे .....हाँ प्रिय यही सच है कि हम अपने स्वार्थ में अंधे होकर सिर्फ अपने दुखों को दर्द को लेकर बेचैन होते हैं रोते हैं लेकिन हम आपका गम आपका दर्द आपकी तकलीफ सब भूले रहते हैं और आपको और भी ज्यादा दुख से नवाजते रहते हैं लेकिन मेरा सच सिर्फ इतना है कि मैं आपकी हर हाल खुशी चाहती हूँ ...हर तरह से भले ही इसके लिए मुझे कुछ भी क्यों न करना पड़े ...मुझे फिक्र है आपकी ,,,,परवाह है आपकी ......इसीलिए तो दुआएं करती हूँ ...इबादत करती हूँ सिर्फ आपकी खुशी के लिए और एक कोशिश करती हूँ कि भले ही मैं मिट जाऊँ पर आप हमेशा खुश रहें जहां भी रहें ....
जो मिली मैं तुमसे मेरा रोम रोम खुशी से खिल गया 
दूर जाकर भी नहीं जा सकी कि अंग अंग महकता है !!
सीमा असीम

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