गतांक से आगे
ओ रे साजन याद मे तेरी यूं भुलाया है खुद को
रात जाती है बात पर कभी जाती नहीं है !1
सुनो प्रिय,
     जो मैं तुम्हें लिखती हूँ न जाने क्यों रचती हूँ यह जान कर  भी कि कोई मतलब ही नहीं है मेरे इन  अल्फ़ाजों का, मेरी बातों का ........प्रिय बहुत कोमल है, बहुत नाजुक है, मेरा प्रेम.... जरा सी बात पर मुरझाने सा लगता है ....मलिन सा होने लगता है....प्रिय आपकी याद में ही गुजर जाते हैं मेरे रात दिन, पल छिन .....लेकिन ये दो दिन न जाने क्या हुआ ...न जाने कितनी बेचैनी ...कितनी परेशानी ....कितनी तकलीफ थी ...समझ ही नहीं आ रहा था ...कुछ किया ही नहीं जा रहा था ....न जाने आपकी किस परेशानी में मन घुला जा रहा था ...पल भर को भी चैन नहीं आ रहा था .....भूख प्यास नींद सब भुला कर मैं बस तुम्हें ही ताक रही थी .....तुम्हारी उस चमकती हुई रोशनी में खोई हुई थी ...प्रिय तुम सच बताना क्या तुम्हें भी वही सब अहसास होता है जो मैं महसूस करती हूँ ...प्रिय  जिस्म से गर जान जुदा कर दी जाये तो वो जिस्म कैसे चलेगा .....कैसे सांस लेगा ...कैसे कोई और काम करेगा ॥...॥ प्रिय सच में बेहद कठिन होता है बहुत ही ज्यादा ॥...किसी पौधे को उठा कर कहीं और रोप देना फिर बार  बार उसे यूं ही  रखना .......न जाने मैं किस तरह से जी लेती हूँ ....न जाने किस तरह से रह लेती हूँ ....बार बार आंखो  में आँसू भर आना ....बार बार ज़ोर से नाम लेकर पुकार लेना ...पूरी दुनियाँ से बेखबर होकर सिर्फ तुम्हें ही जीते रहना .. शायद तुम नहीं समझ पाओगे ...कभी नहीं समझ पाओगे मुझे और मेरे मन की भावनाओं को .....मैं तुम्हें प्रेम करती हूँ ,,,बहुत ही ज्यादा लेकिन मैं तुम्हें अपनी गिरफ्त में कैद नहीं रखना चाहती .....नहीं चाहती कि तुम मेरी जरा सी भी फिक्र करो ......परवाह करो .....पर मुझे कभी भी आपकी गिरफ्त से आपके बंधन से मुक्त होने के लिए मत कहना ....मत कहना प्रिय ......मुझे तो आपका साथ ही पसंद है आपका हर काम पसंद है ...आपका रंग ढंग सब ....जैसा भी है ...इसी तरह से ही सही लगता है .....तुम हर हाल में मुझे स्वीकार हो ......मैंने तो आपसे सच्चा बंधन बांधा है .....पूरी दुनियाँ को बिसरा कर तुम्हें ही अपना माना है ....अब तुम्हारे हाथ में ही है जैसे चाहें मुझे रखो... क्या फर्क पड़ता है मैं तो यूं ही जी लूँगी .....बिना जान के भी जिस्म को संभाल लूँगी .....
कर दी आपके हवाले अपनी जान ओ सनम 
जी लूँगी हर हाल में आपका नाम ले लेकर !!
क्रमशः 
सीमा असीम



Comments

Popular posts from this blog

मुस्कुराना

याद