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सीमा सक्सेना असीम का उपन्यास "अडिग प्रेम" पढ़ना एक स्त्री के मन की यात्रा करने जैसा है।
एक किशोरवय लड़की जो अपने अध्यापक के प्रति आसक्त होती है और परिस्थिति वश उसके साथ एकाकार भी होती है और संपूर्णता के साथ समर्पित भी।
सच्चे और अडिग प्रेम का प्रतीक तथा तन से परे होकर भी मन तक पहुंचा जा सकता है इसका दस्तावेज है यह उपन्यास "अडिग प्रेम"
https://www.google.com/url?sa=i&source=images&cd=&ved=2ahUKEwjtyP-hkL3mAhWSA3IKHZl7BbUQjRx6BAgBEAQ&url=http%3A%2F%2Fwww.hastakshep.com%2Fold%2Ftag%2Fseema-aseem-saxena%2F&psig=AOvVaw39YApd3hv3fpT1peNk3NU0&ust=1576687350127161
सीमा सक्सेना असीम का उपन्यास "अडिग प्रेम" पढ़ना एक स्त्री के मन की यात्रा करने जैसा है।
एक किशोरवय लड़की जो अपने अध्यापक के प्रति आसक्त होती है और परिस्थिति वश उसके साथ एकाकार भी होती है और संपूर्णता के साथ समर्पित भी।
सच्चे और अडिग प्रेम का प्रतीक तथा तन से परे होकर भी मन तक पहुंचा जा सकता है इसका दस्तावेज है यह उपन्यास "अडिग प्रेम"
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सीमा सक्सेना असीम का उपन्यास "अडिग प्रेम" पढ़ना एक स्त्री के मन की यात्रा करने जैसा है।
ReplyDeleteएक किशोरवय लड़की जो अपने अध्यापक के प्रति आसक्त होती है और परिस्थिति वश उसके साथ एकाकार भी होती है और संपूर्णता के साथ समर्पित भी।
सच्चे और अडिग प्रेम का प्रतीक तथा तन से परे होकर भी मन तक पहुंचा जा सकता है इसका दस्तावेज है यह उपन्यास "अडिग प्रेम"