गर जले जब मन में कभी आग 
तो न रहे मन में जरा सी भी ईर्ष्य, द्वेष, और स्वार्थ  
हो जाए सब भस्म जल कर उसी आग में ,,,,,
हाँ यही तो होता है न ,,,जब मेरा मन जलने लगता है प्रेम की आग में तब उसकी लपटें इतनी तेज होती हैं कि जल जाता है सब कुछ और बचा रह जाता है सिर्फ प्रेम , क्योंकि प्रेम कोई वस्तु नहीं है न कोई आँसू या खुशी है बल्कि शाश्वत सत्य है जो सब कुछ जला कर खुद और भी ज्यादा निखर जाता है , ताप कर और पवित्र हो जाता है ... प्रेम एक ऐसी भावना है जिसे देखना चाहो तो जग रोशन कर दे और आँखें बंद करो तो मन रोशन कर देता है ,,,, सही बात तो यह है कि जब मन खुश होता है तब पूरी दुनिया बेहद प्यारी और खूबसूरत नजर आती है न , कहा भी तो गया है कि यह सारी दुनिया मन की है जैसा चाहो वैसा पालो ,,,इसीलिए मैं कहती हूँ कि तुम मेरे ही हो और मैं तुमसे ही हूँ ,यह जीवन उस दिन तक ही इतना प्यारा है जब तक हम हैं तुम हो और है हमारा प्रेम .....
क्या कहूँ या कैसे कहूँ शब्द कम हैं 
और बहुत ज्यादा है हमारा प्रेम ,,,,,,

सीमा असीम 
26,12,19 

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