कि आँख का पानी मर गया 
उसकी आंख में नमी तक बची नहीं ,,,,

ना जाने क्यों आँखें शर्म से झुक जाती हैं ! मैं अक्सर खुद पर ही शर्मिंदा हो जाती हूँ ! कैसे कैसे लोग होते हैं दुनिया में, जिनको न शर्म, न लिहाज, बस अपनी खुशी में खुश और दूसरे की खुशी में आँसू बहाने वाले ! सच में हद है नीचता की ,, क्या तुम जानते हो कि तुमसे कुछ भी कहने का मतलब है खुद के लिए ही कुछ कहना ! तुम्हें गलत कहना मतलब खुद को  गलत कहना, तुम्हें नीचे गिराना मतलब खुद को नीचे गिराना ,हाँ मैं तुमसे नाराज हूँ बहुत ज्यादा नाराज बल्कि यह कहना चाहिए कि मैं खुद से नाराज हूँ ,मैं नहीं चाहती कि तुम मुझे मनाओ इसीलिए मैं खुद से नाराज हूँ तुमसे नहीं, बस शर्मिंदा हूँ सोच सोच कर तुम्हारे प्रेम पर नहीं बल्कि अपने ही प्रेम पर, तुम कैसे कर लेते हो यह सब।  कैसे ? झूठ भी इंसान को उतना ही बोलना चाहिए कि सध जाये, इतना झूठ और बात बात पर झूठ ,, एक झूठ के चक्कर में तुम खुद ही सोचो कि तुमने कितने झूठ बोले हैं और लगातार बोलते ही जाओगे इसलिए तुमसे क्यों कुछ कहूँ, बस बहने दो मेरे आँसू , मत करना कभी इनकी फिक्र , न कभी सोचना मेरे बारे में, न ही मेरे आंसुओं के बारे में , और सोच कर ,कर भी क्या लोगे , मैंने तो इस दुख को ही अपना साथी बना लिया है इसे ही अपने आरलिंगन में बांध लिया है और अपने तड़पते मचलते दिल से लगा लिया है ।  नहीं रही मुझे सुखों की तलाश , क्या करूंगी सुखों को पाकर भी कि तेरे दिये हुए वो सुख भी मेरे लिए दुख के समान है ,,, 
खत्म करके खुद को तुमको यूं ही संवारती रहूँगी 
सनम मैंने तो तुमसे सच में प्रेम किया है ,,,,,

सीमा असीम 
2312,19

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