कितनी चाहत है और कितना दर्द है दिल में
कैसे कहा जाएगा कैसे तुम्हें बताए सनम
हाँ यही सच है न प्रिय कि तुमसे कुछ भी कहना कितना मुश्किल काम है कुछ भी कहा नहीं जाता और तुम मेरी खामोशी कभी समझते नहीं या समझ कर समझना नहीं चाहते ,,प्रिय तुम भी मुझ से होते तो समझते कि प्रेम आखिर होता क्या है , कैसे किया जाता है और कैसे निभाया जाता है ऐसे नहीं होता कि कभी कोई या कभी कोई जो भी साथ चल पड़ा वही तेरा हो गया ,,प्रिय बहुत दर्द होता है प्रेम में जिस्म से जान निकल जाती है और अशक आँखों में स्थायी रूप से घर बना लेते है पल पल में छलक़ते हैं कभी नहीं रुकते बहते हुए आँसू या बात बात में आँखों से गिर पड़ते हैं न जाने कब तक यह दर्द मेरी आँखों से बहेगा ? न जाने कब तक यह दर्द मुझे दुख देता रहेगा ,,,हे ईश्वर जिसे मैं पसंद करूँ वो किसी और को कैसे पसंद कर सकता है ? कैसे किसी और के लिए दिल धड़का सकता है जबकि उसकी धड़कने तो मेरी  धड़कनों के साथ धड़कती हैं ,,,कभी कभी समझ नहीं आता है कुछ ,,कुछ भी समझ नहीं आता ,,,कोई इंसान का जमीर नहीं होता ,,क्या उसका कोई भगवान नहीं होता ? ओ रब तेरे लिए ही मेरी हर सांस है कि बस गया है तू मेरी साँसों में ,,,,
सीमा असीम
12,12,19 

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