जब मैं लिखती हूँ दर्द
तब छलकती हैं दर्द की आँखें भी ...
यही तो सच है न और सच को बदला नहीं जा सकता है सच हमेशा सच ही रहता है ,,,,न जाने मैं तुम्हें कैसे बता पाऊँगी या जाने तुम कैसे समझ पाओगे या फिर कभी तुम्हें अहसास भी होगा या नहीं पता नहीं मैं कुछ नहीं जानती लेकिन इतना जानती हूँ कि मैंने सच्चे मन से चाहा और चाहती रहूँगी कभी भी अपने किए वादों से पीछे नहीं रहूँगी ! बस यही एक बात ही मेरे टूटते हुए मनोबल का सहारा है कि जो कहा है उसे हर हाल में पूरी श्रीद्धा से निभा कर रहूँगी भले ही इसके लिए मुझे अपनी जान ही क्यों न देनी पद जाये आखिर इंसान कि जुबान ही उसे उठाती और गिराती है अगर हम अपनी जुबान के धनी हैं तो दुनिया की कोई भी शक्ति हमें नीचा नहीं दिखा सकती क्योंकि हम जो हैं सो हैं और वही बने रहेंगे ! यही मेरा अडिग विश्वास है और मेरे जीवन की शक्ति भी !
जब कभी मैं लिखना चाहती हूँ कि मुझे अपने हर पल में शक्ति चाहिए जीने की ऊर्जा चाहिए तो मुझे मिल जाती है और मैं हर मुश्किल हर कठिनाई से बाहर निकल आती हूँ , रोते हुए भी मुस्कुरा देती हूँ और मरते हुए भी जी उठती हूँ !
सब कुछ वैसा ही है सब वैसा ही रहेगा
ना बदला है कभी न यह रंग बदलेगा ,,,
सीमा असीम
9458606469

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