मैंने तो साथ मांग लिया है तुम्हारा
अब कभी कहीं मैं अकेली नहीं होती
हाँ मैं यही तो कहना चाहती हूँ मैं कि तुम हमेशा मेरे साथ होते हो जहां मैं वहाँ तुम और जहां तुम वहाँ मैं कभी कहीं भी तुम्हें याद करने या पुकारने की जरूरत ही नहीं होती ! याद है न तुम्हें तुम ही तो कहते हो न कि साथ होने से हम साथ हो यह जरूरी नहीं है बल्कि हम तो हमेशा साथ है दूर रहकर भी , हैं न , सुनो अब की  बार जब तुम आना न तो कोई ऐसी निशानी दे जाना जिसे मैं हमेशा अपने पास रख सकूँ और जब जी चाहें उसे सहेजूँ , जब जी चाहें उसे निहार लूँ कि कहाँ जरूरत होगी फिर तुम्हारे होने की ,,, हैं न ,,,
लेकिन क्या तुम नहीं चाहते कि हम साथ हो ,, हाथों में हाथ हों ,, दिन हो या रात हो सिर्फ प्यार की बात हो कि यह प्रेम ही बचा सकता है दुनिया को और जब है तो और कुछ माने नहीं रखता॥ प्रेम के आगे सब हार जाओ फिर भी कम है ,,प्रेम में कुछ बचता ही कब है ,,, कुछ भी नहीं सब मिट जाता है जलकर भस्म हो जाता है ,,, अहम ,,झूठ ,, दगा ,, छल ,,सब कुछ खत्म ,,बस बचा रहता है प्रेम और यही प्रेम हार कर भी नहीं हारता ,हर दफा जीत जाता है ,,कि पवित्र मन और सच के आगे सब हार जाते हैं ,,,जीत हो जाती है तो सिर्फ सच्चे प्रेम की ,,,

न झूठ बचेगा न छल बचेगा हार जायेगी नफरत भी
गर बचेगा कुछ तो वो होगा प्रेम और कुछ नहीं !!
सीमा असीम
24,12,19 

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