सच कहूँ तो आज कुछ लिखने का दिल ही नहीं चाह रहा ,कुछ भी कहने का, सुनने का, सुनने का कोई भी फायदा कहाँ होता है या कभी होगा भी इसलिए बस चुप रहो एकदम से चुप बल्कि इतना खामोश हो जाओ कि खामोशियाँ बोलने लग जाये शोर मचा दे इतना कोलाहल मच जाए कि कुछ भी कहने सुनने की जरूरत ही न रहे लेकिन ना जाने कब बोल पड़ेगी यह खामोशी तब पीटीए नहीं जाने क्या होगा , कहीं कुछ गलत न हों जाये ,,
दिल न जाने क्यों चाहता है उस शख्स को सजा देना जो गलत है और अपनी गलती अपने झूठ पर शर्मिंदा नहीं है बल्कि वो बेशर्म की तरह से डटा हुआ है मानों वो सही है सच है और उसने कोई गलती नहीं की है ! ऐसे लोगों को क्या कहा जाये ? क्या सुना जाये ? किस तरह से उसे अपनी गलती का अहसास कराया जाये ? कोई कैसे इतना गिर जाता है ? कैसे अपने आप को समझा पाता है और किस तरह से अपनी गलती का उसे अहसास होगा ? न जाने कब वो कहेगा कि मैंने गलत किया ? मैंने तुम्हें दुख दिया ! मैंने ही भरे तेरी आँखों में आँसू ,लेकिन वो कहाँ समझ पाएगा मेरा दर्द और मेरा दुख जबकि वो खुद की खुशी में डूबा है और खुद को हर तरह से सही मानता है और किसी भी तरह से शर्मिंदा नहीं है ! सच में अफसोस है बेहद अफसोस ,,,,,
सीमा असीम
19,12,19
दिल न जाने क्यों चाहता है उस शख्स को सजा देना जो गलत है और अपनी गलती अपने झूठ पर शर्मिंदा नहीं है बल्कि वो बेशर्म की तरह से डटा हुआ है मानों वो सही है सच है और उसने कोई गलती नहीं की है ! ऐसे लोगों को क्या कहा जाये ? क्या सुना जाये ? किस तरह से उसे अपनी गलती का अहसास कराया जाये ? कोई कैसे इतना गिर जाता है ? कैसे अपने आप को समझा पाता है और किस तरह से अपनी गलती का उसे अहसास होगा ? न जाने कब वो कहेगा कि मैंने गलत किया ? मैंने तुम्हें दुख दिया ! मैंने ही भरे तेरी आँखों में आँसू ,लेकिन वो कहाँ समझ पाएगा मेरा दर्द और मेरा दुख जबकि वो खुद की खुशी में डूबा है और खुद को हर तरह से सही मानता है और किसी भी तरह से शर्मिंदा नहीं है ! सच में अफसोस है बेहद अफसोस ,,,,,
सीमा असीम
19,12,19
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