ज़िंदगी खूबसूरत है मगर झूठ है
वफ़ा प्यार इश्क भरम है सिर्फ भरम ,,,
कभी कभी मन सोचता है कि मैं भी कितनी मुर्ख हूँ वाकई पूरी बुद्धू , तभी तो इतना विश्वास करने लगी खुद से भी ज्यादा लेकिन कभी सोचती हूँ कि जब\ज़िंदगी ही बेवफा है एक दिन साथ छोड़ देती है तब किसी पर कितना भी भरोसा करो वो तोड़ ही देता है लेकिन यह सब बातें दिल नहीं समझता है उसे बेहद दुःख होता था , बहुत दर्द भी होता है और फिर दुनिया से ही विश्वास उठ जाता है कुछ भी अच्छा नहीं लगता है कोई भी अच्छा नहीं लगता है हर कोई झूठा और फरेबी नजर आने लगता है एक एक बात आँखों के सामने से गुजरती है किसी चलचित्र की ा तरह और सारे भ्रम दूर हो जाते हैं याद आती है तो वे दुःख वे कष्ट जो जान बूझकर तुमने दिए वे शब्द मानों आत्मा को चीरते चले जाते हैं जो तुम कहते थे सच यह दिल सबकुछ समझता है जानता है इसको किसी भी तरह से बहलाया नहीं जा सकता है न किसी तरह से समझाया जा सकता है क्योंकि मेरा ऐसा मानना है कि अगर हमारा मन सच्चा है तो वो कभी गलत बात को स्वीकार ही नहीं करेगा कभी भी नहीं , मैंने हमेशा तुम्हारे रंग में ढलने की कोशिश की और रंग भी गयी लेकिन सब व्यर्थ , सब बेकार, तुम वैसे ही रहे जैसा तुमको रहना था फिर भी एक बात याद रखना, गया हुआ विश्वास कभी नहीं लौटता है और अब विश्वास नहीं करती बिलकुल भी नहीं तुम विश्वास के लायक हो ही नहीं लेकिन अब बर्बाद होकर समझी या अक्ल आयी तो क्या आयी मेरे आँसू जो अभी बह रहे हैं न यह मेरी सच्चाई का प्रतीक हैं यह जो भर भर के दिल तड़प रहा है न यह मेरे साफ और पवित्र दिल की निशानी है खैर मैं अब कुछ नहीं कर सकती कुछ भी तुम अपनी दग़ाबाजियों में माहिर हो एक दम से किसी पक्के खिलाड़ी के जैसे वरन मुझसे सच्चा प्रेम करते तुम तो एक बार मुझे सच्चे दिल से आवाज लगाते ,
जैसे तुम पहले दोस्ती करते हो फिर उससे दिन रात बातें करते हो उसका हर तरह से ख्याल रखते हो छोटी से छोटी बात का भी और जीत लेते हो उसका मन फिर शुरू हो जाता है प्रेम और प्रेम में सब जायज है और ,,,,,,,,,आखिर कब तक दिल भर ही जाता है न और फिर कुछ नया होना चाहिए ज़िंदगी में बस ,,,,,,उफ्फ्फ तुम्हारी सोच को सलाम ,सच में सेल्यूट। ...
फिर समय ही नहीं होता है न बात करने का न ख्याल रखने का क्या पता ऐसा क्यों लेकिन यही सच है यही प्रेम का स्वरुप कि यह दुनिया स्वार्थी है बेहद स्वार्थी ,,वादे बातें सब एक भरम ,,,,,
काश कि यह दुनिया सच पर टिकी होती
तो दिल में इतना दर्द न होता
हाँ सनम इतना दर्द न होता
। .. सीमा असीम
२५,८,१९
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