यह दर्द है ख़ुशी है या प्रेम छलक आया है
बह रहा है आँखों से न जाने क्यों न जाने क्यों
सुनो
 आज सच में समझ नहीं आ रहा है कि क्यों बहने लगी है मेरी आँखों में नमी और क्यों दिल भरा आ रहा है कितना भी समझा लो अपने मन को लेकिन बहुत ज्यादा उदास है बहुत ही ज्यादा,  मुझे क्यों आज इस तकलीफ का अहसास हो रहा है , सनम तुम्हारे सिवाय किसी और के बारे  में सोच ही नहीं पाती किसी और के साथ बात करूँ मन  बेचैन सा हो  जाता है जैसे कि बस तुम्हारे लिए ही मैं बनी हूँ किसी और से कोई वास्ता ही नहीं है और तुम्हारी हर ख़ुशी में निसार हूँ क्या तुम्हारा मन भी ऐसा ही करता है क्या तुम भी मुझे यूँ ही याद करते हो वैसे सच तो यही है कि तुम भी मुझे उतना ही प्रेम करते हो जैसे मैं तुम्हें करती हूँ तभी तो मन बेचैनी से भर जाता है दर्द से तड़प जाता है और फिर कुछ भी अच्छा नहीं लगता है न यह दुनिया न ही दुनिया की बातें ,क्या करूँ अब मैं कि एक बार तुम्हें अपने मन की उदासियाँ बेचैनिया बता दूँ और तुम्हारी सब सुन लूँ जिससे तुम्हारे मन को भी तसल्ली हो जाए और यह दर्द गम उदासी बेचैनी सब कहीं दूर छूमंतर हो जाए और आँखों से नमी की जगह छलकने लगे ख़ुशी के फूल ख़ुशी की चमक तो करो न कुछ ऐसा कि हर तरफ खुशियां ही खुशियां ही बिखर जाएँ। ...
आपको याद करूँ तो अश्क बहते हैं
आपको देखूं तो अश्क बहते हैं
क्या करूँ मैं ऐसा गम कम हो जाएँ
या रब तू कर न कुछ
हम ख़ुशी से झूम जाएँ
ख़ुशी से मुस्कुरा जाएँ। ..




सीमा असीम
२१,८,१९ 

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