तुमसे कभी कुछ गलत कहना मेरी ही तौहीन है सनम
मगर मेरी आँख नम है बहुत ही नम है सनम। ...
सुनो जब भी तुमसे कुछ कहना चाहती हूँ तभी मेरा मन कहता है कि जबी तुमसे कहकर तुम्हें तुम्हारी गलती का अहसास कराया तो क्या फायदा तुम्हें तो स्वयं ही अपनी गलतियों का करनियों का अहसास होना ही चाहिए और तुम्हें खुद ही होगा अहसास एक दिन तब तुम्हें समझ आएगा कि तुम गलत थे और अपनी गलतियों को सही बताने का काम ताउम्र करते रहे लेकिन प्रिय प्रेम की भाषा तो तुम कभी नहीं समझ सकते क्योंकि तुम्हारे मन में कोई सच का भाव ही नहीं है न कभी था न कभी होगा अगर होता तो मेरी बहते हुए अश्क और मेरे रट तड़पते हुए दिल की पुकार तुम तक जरूर पहुँच जाती भी उतना ही तड़पते जितना कि मेरा दिल तड़पता है। ...खैर सनम क्या कहूं अब मैं मुझे तो हमेशा ही रुलाया तड़पाया और अपनी ख़ुशी के लिए न जाने क्या क्या किया पर एक बात याद रखना तुम यह जो मेरे आंसू बाह रहे रहे हैं न इनका कर्जा तुम पर चढ़ता जा रहा है पता नहीं कैसे उतारोगे यह कर्ज ,वैसे मेरे सनम तुम्हारी तो नस नस मेरी कर्जदार है तुम तो बस लेते ही रहे मुझसे कभी किसी तरह से और कभी किसी तरह से ,
तेरे लिए खुद को मिटाया है मैनें और
सनम तू मेरा होकर भी बेखबर बेदर्द है। ..
सीमा असीम
१७,८,१९
मगर मेरी आँख नम है बहुत ही नम है सनम। ...
सुनो जब भी तुमसे कुछ कहना चाहती हूँ तभी मेरा मन कहता है कि जबी तुमसे कहकर तुम्हें तुम्हारी गलती का अहसास कराया तो क्या फायदा तुम्हें तो स्वयं ही अपनी गलतियों का करनियों का अहसास होना ही चाहिए और तुम्हें खुद ही होगा अहसास एक दिन तब तुम्हें समझ आएगा कि तुम गलत थे और अपनी गलतियों को सही बताने का काम ताउम्र करते रहे लेकिन प्रिय प्रेम की भाषा तो तुम कभी नहीं समझ सकते क्योंकि तुम्हारे मन में कोई सच का भाव ही नहीं है न कभी था न कभी होगा अगर होता तो मेरी बहते हुए अश्क और मेरे रट तड़पते हुए दिल की पुकार तुम तक जरूर पहुँच जाती भी उतना ही तड़पते जितना कि मेरा दिल तड़पता है। ...खैर सनम क्या कहूं अब मैं मुझे तो हमेशा ही रुलाया तड़पाया और अपनी ख़ुशी के लिए न जाने क्या क्या किया पर एक बात याद रखना तुम यह जो मेरे आंसू बाह रहे रहे हैं न इनका कर्जा तुम पर चढ़ता जा रहा है पता नहीं कैसे उतारोगे यह कर्ज ,वैसे मेरे सनम तुम्हारी तो नस नस मेरी कर्जदार है तुम तो बस लेते ही रहे मुझसे कभी किसी तरह से और कभी किसी तरह से ,
तेरे लिए खुद को मिटाया है मैनें और
सनम तू मेरा होकर भी बेखबर बेदर्द है। ..
सीमा असीम
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