कोई साया सा मेरे हमेशा साथ रहता है
वो तुम हो सिर्फ तुम हाँ सिर्फ तुम ही। ..
सुनो जब मैं तुम्हें याद करती हूँ न तो तुम्हे याद नहीं करती बल्कि खुद को भुला देती हूँ सनम तुम्हें याद करने का मतलब ही खुद को भुला देना है खुद को खो देना है और जब मन की सच्ची लगन तुमसे लगी है तब क्या खुद को याद रखूं और कैसे याद रखूं ? अब प्रिय तुम ही बता दो मुझे कि प्रेम में किस तरह से खुद को बचाये रखूं मैं जब मैं कुछ बची ही नहीं जो कुछ हो वो सिर्फ तुम ही तो हो ,,,,, बड़ा अजीब सा लगता है न कि खुद का कुछ भी न होना या खुद को मिटा देना ,लेकिन यही सच है प्रिय कि तुम्हारे लिए या अपनी ख़ुशी के लिए मैं वो सब करुँगी जो तुम चाहते हो या जैसा तुम चाहते हो बिलकुल वैसी ही बन जाउंगी क्योंकि प्रिय मैं तुम्हें चाहती हूँ और तुम्हें चाहना मतलब दुनिया की सारी खुशियों से अपना दामन भर लेना और मैं यह बात ाख़ूबी जानती हूँ कि तुम मुझे मुझसे भी ज्यादा चाहते हो मेरी ख़ुशी के लिए खुद को निसार कर देते हो और बिलकुल मेरे जैसे बनकर मेरे लिए खुद को मिटा देते हो। ...
तुम यूँ चले सनम भादों की रातों में ख्वाब बनकर
जैसे काली अँधेरी रात बारिश के बीच बिजली चमकती है
सीमा असीम
२०,८,१९
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