Posts

 मेरा विश्वास पुख्ता हुआ बहुत बार टूटी हूँ, बिखरी हूँ, फिर खुद ही खुद को समेटा है, गिरी हूँ कई बार अंधेरे में, फिर खुद ही दिया जलाया है। लोगों ने कहा, "अब नहीं होगा", रास्तों ने कहा, "अब मंज़िल नहीं", पर हर बार दिल ने धीरे से कहा - "एक कोशिश और सही।" आज पीछे मुड़कर देखती हूँ, तो हर ज़ख्म एक निशान नहीं, एक मेडल लगता है। कि हाँ, मैं लड़ी थी, और मैं जीती थी। इसलिए आज कहती हूँ, गर्व से, प्यार से, और पूरी साँस लेकर - मेरा विश्वास पुख्ता हुआ। कि मैं कम नहीं हूँ, कि मेरा वक्त आएगा, कि ईश्वर देर भले कर दे, पर अंधेर नहीं करता। और जो हाथ छूट गए, वो छूटने ही थे, ताकि जो हाथ थामने हैं, उनके लिए जगह बन सके। सीमा असीम 

मेरा विश्वास - फिर से

 मेरा विश्वास - फिर से जब तुमने मेरा विश्वास तोड़ा, मेरा विश्वास दुनिया से ही उठ गया। जब तुमने मेरा हाथ छोड़ा, मैंने दुनिया से ही नाता तोड़ दिया। विश्वास तो वो पूँजी थी मेरी, जो सिर्फ़ तुम्हारे नाम की थी। पर तुम उसके लायक ही नहीं थे, ये बात देर से समझी थी। मैं छली गई थी, ठगी गई थी, लड़खड़ा कर वहीं गिर पड़ी थी। फिर धीरे-धीरे, अकेले ही, मैं खुद ही खुद से चल पड़ी थी। फिर मेरा विश्वास खुद जगा, मेरा मनोबल फिर से बढ़ा। मैं अपने ही आत्मबल से फिर से खड़ी हो गई। ये सोचकर कि - अभी भी विश्वास बाकी है इस दुनिया में। सीमा असीम  5,8,26

कविता ❤️

 पुकारो ना मुझे  थोड़ा जोर से पुकारो  शायद तुम्हारी आवाज  मुझ तक नहीं आ पा रही  पुकार तो रहे हो तुम  लेकिन तुम हल्के हल्के पुकार रहे हो  बहुत धीमे-धीमे  तुम्हारी आवाज निकल रही है  थोड़ी जोर से आवाज निकालो  जिससे मेरा तन मन झंकृत हो जाए  रोम रोम खिल जाए और  मां महक जाए  प्रेम के सागर में गोते लगाकर निखार जाए  क्या तुम नहीं जानते  प्रेम कभी कम नहीं होता  वह तो बढ़ता ही जाता है  दूर रहो या पास  उसमें कोई अंतर नहीं आता  प्रेम तो मन में रहता है  क्योंकि प्रेम ना कम होता है  ना प्रेम ज्यादा होता है  प्रेम तो सिर्फ प्रेम होता है... सीमा असीम  17,7,26

कविता ❤️

 आजा रे अब मेरा दिल तुम्हें पुकार रहा है  सच्चे मन से गुहार लगा रहा है   तुम तक मेरी आवाज तो पहुँच जाती होगी ना  तुम्हें भी सोते-सोते नींद खुल जाती होगी ना  और चौंक कर जग जाते होंगे ना और  आसपास देखने लगते होंगे ना  अपने बिस्तर को तटोल कर देखते होंगे ना  शायद तुम्हें एहसास होता होगा कि  मैं तुम्हारे पास नहीं लेटी हूं और  तुम गुनगुनाने लगते हो लग जा गले से  लेकिन तुम मुझे वहां नहीं पाते हो तो  उदास हो जाते होंगे  क्यों नहीं समझते  तुम्हारे बिना उदासी का चोला ही पा लिया है मैंने  तो अब आ जाओ या मुझे पुकार लो  एक बार ही सिर्फ एक बार  ही  सीमा असीम  16,7,26 अपने सच्चे मन से...

कविता

 कभी आसमान के तारों को देखा है  देखना कभी चांद से ज्यादा प्यारे तुम्हें सितारे लगते हैं न  चांद तो सिर्फ एक ही है तारे अनेक  तुम्हें तो सितारों को देखने की आदत भी है ना  एक चांद को कहां तक निहारोगे तुम  1 तारे को देखो  कभी दूसरे तारे को देखो  इस तरह तुम कई तारों को देख सकते हो ना  और चांद बेचारा एक है  तुम्हारा मन कहां लगेगा भला  हैं न 
नित्या और जिम्नास्टिक वाली छत बड़े शहर में, जहाँ ऊँची-ऊँची बिल्डिंगें आसमान को छूती हैं और नीचे दिन भर गाड़ियाँ भागती हैं, वहाँ 15वीं मंजिल के एक छोटे से फ्लैट में रहती थी नित्या। नित्या के घर के सामने कोई बड़ा मैदान नहीं था। नीचे पार्क था भी तो वहाँ इतनी भीड़ होती थी कि भागने-दौड़ने की जगह ही नहीं मिलती थी। इसलिए नित्या घर में ही सोफे पर से कूदती, बालकनी में लुढ़कती रहती। पापा कहते, "अरे ये तो बंदरिया है!" मम्मी कहतीं, "इसकी एनर्जी को कहीं तो लगाना पड़ेगा।" एक दिन सोसाइटी के नोटिस बोर्ड पर एक पोस्टर लगा देखा -  "सनशाइन जिम्नास्टिक अकादमी - अब हमारे क्लब हाउस में! 5 से 10 साल के बच्चों के लिए।" नित्या की आँखें चमक गईं। "मम्मी, मुझे जाना है!" अकादमी बड़े शहर जैसी ही थी - शीशे की दीवारें, रंग-बिरंगा बड़ा सा हॉल, नरम-नरम मैट, और हवा में उड़ते हुए रिबन। वहाँ शहर के अलग-अलग कोनों से बच्चे आते थे। कोई अंग्रेजी में बात करता, कोई हिंदी में, पर सबको एक ही चीज़ आती थी - उछलना! शुरू में नित्या को बड़ा अजीब लगा। बाकी लड़कियाँ तो पहले से ही हैण्डस्टैंड कर लेत...

प्रेम कविता ❤️

 तुम क्या करते हो  क्या नहीं  मुझे नहीं पता लेकिन  मुझे बस इतना पता है कि तुम मुझे और सिर्फ मुझे ही प्रेम करते हो  मेरा सच्चा प्रेम तुम्हारे मन में  हर वक़्त उमड़ता रहता है और  मुझे पुकारता रहता है  याद करता रहता है  तभी तो मैं यहां  हर बार तुम्हें याद करती हूं  तुम्हारी बात करती हूँ  क्योंकि सच्चा प्रेम  हर कोई नहीं करता और  जो सच्चा प्रेम कर लेता है  उसका प्रेम अथाह हो जाता है  अनंत हो जाता है और अमर हो जाता है  और फिर ब्रह्मांड में गूँजता रहता है उनका नाम  जिसे लोग महसूस कर लेते हैं  अहसास में भर लेते हैं.. सीमा असीम  14,7,26