मैं रहती हूं तुम्हारे दिल में

 नहीं जा पाती हुँ पल भर को भी दूर कहीं तुम से 

जहां तुम वहाँ मैं और 

जहाँ मैं वहाँ तुम 

  संग संग रहती हूं मैं सदा तुम्हारे 

जब तुम साँस लेते हो ना 

तभी मैं सांस लेती हूं

जब तुम हंसते हो तब मैं हँसती हुँ और 

जब तुम रोते हो तो संग संग रो देती हुँ  मैं तुम्हारे 

 खाते पीते सोते जागते हरदम तो तुम्हारे साथ रहती हूं 

बताओ भला 

दिल से भी किसी को कहीं निकाला जा सकता है क्या 

कभी नहीं ना, कभी भी नहीं 

यह तो संभव ही नहीं है कि जुदा हो सके मेरी आत्मा से कभी तुम्हारी आत्मा... 

सीमा असीम 

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