कभी-कभी हम मजबूर होते हैं
बेइंतिहा मजबूर होते हैं
हम चाह कर भी कुछ नहीं कर पाते लेकिन
हम भले ही कुछ नहीं कर पाते या
नहीं कर रहे होते हैं
पर हमारा ईश्वर जो सब देख रहा होता है
वो अंदर ही अंदर हमारे भले के लिए कर रहा होता है
जैसा हम चाहते हैं उससे भी कहीं ज्यादा
एक सुंदर संसार रच रहा होता है
और जब ईश्वर करता है न
तो फ़िर सारी दूनिया सिर्फ भौचक होकर देखती रह जाती है..
क्योंकि तुम किसी की सरलता का फायदा उठा कर उसे यूँ फेंक देते हो न
उस वक्त ईश्वर अपनी बाँहों का सहारा दे देते हैं और हर तरह से संभाल लेते हैं...
सीमा असीम
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