सजानी थी मुस्कान मेरे चेहरे पर पर तूने मेरी आँख में आंसू भर दिए  

इतने गम ही गम दिये और जिस्म में जख्म भर दिये 

तुझे क्यों खयाल ही नहीं आया एक बार भी मेरा 

 मैंने तो दी थी तुझे हमेशा खुशी ही ख़ुशी और तुमने मुझे दर्द दे दिए 

तड़प जाती है दर्द से रूह मेरी आत्मा तक, तूने इतने घाव दे दिये 

तुझे तो समझा था मैंने सिर्फ अपना ही अपनेपन के बदले तूने मुझे ऐसे कैसे सिले दे दिए 

काश कि तेरे जिस्म में होता एक मासूम सा प्यारा दिल भी 

तो दिमाग से ही न सोचता, सोचता कभी दिल से भी 

न करता हर जगह दिमाग का ही प्रयोग तो आज मेरी आंखों में आंसू ना होते और मेरे चेहरे पर मुस्कान सजी होती क्योंकि मुझे मिलता प्रेम के बदले प्रेम अपने पन के  बदले में अपना पन  त्याग के बदले में त्याग और समर्पण के बदले में समर्पण

 कोई बात नहीं वक्त तो सबका आता  है वक्त कहां ठहरता है भला,  वक्त कभी कहीं नहीं रुकता है वो तो चलता ही रहता है अपनी रफ्तार से और जो आज तू कर रहा है मेरे साथ कल को तेरे साथ भी शायद यहीं होगा तू भी तड़पेगा रोएगा 

 और तेरी आत्मा तुझे धिक्कारेगी हां जरूर जरूर ऐसा ही होगा, यही नियति है..... 

सीमा असीम 

Comments

Popular posts from this blog

मुस्कुराना

याद