जी चाहता है सारी दुनिया में ले आऊं तबाही 

भोले बाबा की तरह अपना तीसरा नेत्र खोल दूँ 

इतना घबराता है जी कभी-कभी 

कितना भी रो लूँ  पूरा नहीं होता

 कुछ भी करने को दिल चाहता है 

पूरी दुनिया से पानी पानी सिर्फ पानी

 सिर्फ पानी भर देने को जी चाहता है 

 पूछना चाहती हूं मैं ईश्वर से एक बार मिलकर 

अगर तूने  दुनिया बनाई है यह दूनिया तो 

तूने अच्छे इंसान नहीं बनाये 

कुछ तो आंखों में इंसान की शर्म दी होती 

कुछ तो आंखों में दर्द दिया होता 

छल कपट प्रपंच रचने के अलावा

 कुछ तो इंसानों के अंदर इंसानियत होती 

 ईश्वर मैं तो सिर्फ यह पूछना चाहती हूं सिर्फ

 कि तूने मुझे इतने दुख क्यों दिये 

 कि मेरी आंखों के आंसू थमते नहीं हैं

असीम 


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