चलो मां मैं कल चली ही जाती हूं जब भी तो इतना कह रही है आज आप फिर इतने दिनों के बाद हमारा संग साथ होगा तो अच्छा लगेगा लेकिन एक बात सुनो मैं पैकिंग तो कर लेती हूं 2 दिन का प्रोग्राम है पर आप कुछ खाली मैं परेशान नहीं होगी और कुछ बनाएंगे नहीं जाकर हमेशा किचन में खड़ी रहती हैं कुछ ना कुछ बनाने के लिए आशियाने खुश होकर मां से बात हुई थी ना जाने कितने दिनों के बाद उसके मन को थोड़ा सा सुकून से आया था कहीं जाने में बाहर निकलने में लोगों से मिलने के बाद मन तो अच्छा होता ही है और जब विचार ही आया जाने का तभी इतना अच्छा लग रहा है
चांद को देखना एक तक देखते जाना घटते बढ़ते और 16 कलाओं से परिपूर्ण होते जाना कितना सरल है ना चांद को देखना चांद की पवित्र चांदी में नहाई धरती पर अपनी परछाई को पकड़ने की कोशिश करना छोटी बड़ी आड़ी तिरछी लंबी नाटी परछाई को पकड़ कर अपने गले से लगाने की कोशिश करना सरल है ना परछाई को नापना इतना ही सरल तो है बस तुम्हें पढ़ना और सिलसिलेवार लिखते चले जाना चाँद का आसमां में मुस्कुराना सीमा असीम 23,2,21
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