चलो मां मैं कल चली ही जाती हूं जब भी तो इतना कह रही है आज आप फिर इतने दिनों के बाद हमारा संग साथ होगा तो अच्छा लगेगा लेकिन एक बात सुनो मैं पैकिंग तो कर लेती हूं 2 दिन का प्रोग्राम है पर आप कुछ खाली मैं परेशान नहीं होगी और कुछ बनाएंगे नहीं जाकर हमेशा किचन में खड़ी रहती हैं कुछ ना कुछ बनाने के लिए आशियाने खुश होकर मां से बात हुई थी ना जाने कितने दिनों के बाद उसके मन को थोड़ा सा सुकून से आया था कहीं जाने में बाहर निकलने में लोगों से मिलने के बाद मन तो अच्छा होता ही है और जब विचार ही आया जाने का तभी इतना अच्छा लग रहा है
प्रेम
जहाँ प्रेम है वहाँ सुख है ख़ुशी है जहाँ सुख है ख़ुशी है वहाँ है प्रेम प्रेम क्षणभंगूर नहीं अनंत काल की यात्रा है एक जीवन में कहाँ पूरा होता है प्रेम न जाने कैसे कर लेते हैं लोग छोटे से जीवन में किसी से घृणा प्रेम नफ़रत और जरा देर में बदल लेते हैं अपनी भावनाओं को वो कब समझेंगे क्या होता है प्रेम न कहने से न सुनने से अहसासों की भाषा है यह आत्मा से आत्मा का मिलना है प्रेम फूल इंद्रधनुष बारिश ओस देख मुस्कुरा देता है मन भोला भोला मासूमियत से भरा होता है प्रेम प्रेम करते हैं सभी जीवन में एक बार जरूर जो निभा ले सच्चे मन से वहां ईश्वर बन जाता है प्रेम!! सीमा असीम
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