हां मैं तुम्हारा इंतजार करती हूं
हर पल में हर क्षण में
अपनी हर आती-जाती सांस के साथ
मैं तुम्हारा नाम लेती हूं
हां मैं जानती हूं कि तुम मेरे हो सिर्फ मेरे ही
तभी तो मैंने तुम्हें जाने दिया
बहुत दूर तक जाने के लिए मैंने बहुत बड़ी ढील दे दी तुम्हें
लेकिन सुनो तुम कहीं जाकर भी तो नहीं जा पाए
तुम जा नहीं सकते कहीं क्योंकि तुम तो सदा वही हो
जहां मैं हूं यहां जहां मेरी सांसे हैं और जहां मेरी आत्मा है
हां तुम्हारी उड़ान बस उतनी ही तो है जहां तक मेरी आत्मा जाती है
फिर भी मैं करती रहती हूं तुम्हारा इंतजार हर पल हर क्षण ना जाने क्यों ना जाने क्यों...
सीमा असीम
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