उम्मीद


 जब हम किसी से उम्मीद रखते हैं

 और ज़ब वे  पूरी नहीं होती तो

 हम उदास हो जाते हैं

निराश हो जाते हैं

 हताश हो जाते हैं और

दुख के सागर में डूब जाते हैं

 पर हम ऐसा कभी सोचते ही नहीं कि

अगर यह उम्मीद हमने अपने आप से रखी होती

 फिर हम उसे पूरा कर रहे होते तो

 हमें कितनी खुशी मिलती

तब  ना हमारे मन में निराशा होती

 न हताशा  होती

 ना उदासी होती और

ना ही हमारे पास होते दुःख

परंतु हम ऐसा करते ही कहाँ है

 हम तो सिर्फ दूसरों से ही अपेक्षाएं रखते है

दूसरों की तरफ़ ताका करते हैं

 कभी अपने मन की गहराई में उतर कर देखो कि

 तुम क्या पाना चाहते हो

किस बात से ख़ुशी मिलती है 

और फिर उसे पाने के लिए शिद्दत से जुट जाओ

 देखो कैसे पूरे नहीं होते तुम्हारे सारे ख्वाब

 कैसे नहीं पूरी होती मन की सारी अपेक्षाएं

लेकिन करो जो भी उसे सच्चे मन से करो

फिर वह सब कुछ पा जाओगे जो

 तुम पाना चाहते हो...

सीमा असीम

7,1,21

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

मुस्कुराना

याद