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Showing posts from August, 2019
मैंने अपनी बाहें हवा में फैला रखी है मानों तुम आओगे और समां जाओगे  सुनो प्रिय  कितना पुकारता है तुम्हें मेरा मन और तुम्हें पुकारते पुकारते हुए खुद से ही रूठ जाता है आखिर  कितना पुकारूँ मैं तुम्हें,  क्या तुम समझ जाते हो या तुम्हें समझ नहीं आता है वैसे मुझे तो लगता है कि तुम मेरे मन की हर बात बिना कहे समझ जाते हो, जैसे मैं समझ जाती हूँ मुझे नहीं लगता है कि हमें अपनी बातें एक दूसरे से कहनी चाहिए लेकिन जब कभी मन बहुत ज्यादा भारी होता है तब दिल चाहता है कि मैं अपने मन की हर वो बात तुमसे कह दूँ जो मुझे दुःख दे रही है गलत भावनाएं मन में भर रही है और मेरा जीना ही मुश्किल किये दे रही है ,पता है यूँ लगता है मुझे कि यह जीवन यह ज़िंदगी व्यर्थ है इसका कोई मतलब ही नहीं है न जाने क्यों जिए जा रही हूँ न जाने कौन सी आस जीने को मजबूर कर रही है १ सनम एक कहानी बता रही हूँ तुम्हें कहानी क्या हकीकत ही है एक दिन जब मैं सुबह मॉर्निग वाक पर जा रही थी तब  मैंने देखा एक चिड़िया फुदकती हुई जमीं पर उतरी मैनें उसे बड़े प्यार से देखा और उसे बाहों में भरना चाहा तभी उसने अपने पंख फैलाये...
सोचती हूँ कि रात आये तो ख्वाब में आप आएं सुबह हो तो आप सच में सामने आ जाए। .. सुनो प्रिय हम कितनी उम्मीदें ख्वाहिशें पाल लेते हैं और उन उम्मीदों और ख्वाहिशों का पीछा करते हुए पूरी ज़िंदगी गुजार  देते हैं और वे हमें कितने दुःख तकलीफ    और कष्ट देते इसकी परवाह ही नहीं करते वैसे परवाह करें भी तो करे कैसे क्योंकि हम तो अपनी सुध बुध बिसराये उन उम्मीदों से ऐसे बांध जाते हैं कि हम उनसे पार नहीं पा पाते , क्या कहूं बस  यही कहना है कि मैं आजकल इसी डोर में  बंध  गयी हूँ और बंधन इतना मजबूत है कि कोई तोड़ नहीं सकता न हम न ही कोई और शायद ईश्वर भी नहीं ! सनम आज तो मेरा न मन अच्छा है और न ही तन किसी मशीन की तरह खींचे लिए जा रही हूँ और मेरा बेजान मन तुमसे  कई सवाल करना  चाहता है मिलकर कुछ पूछना चाहता है लेकिन क्या मैं तुमसे वो सवाल पूछ पाऊँगी अगर पूछ भी लिए तो क्या तुम मुझे सही जवाब दे पाओगे या फिर आज तक जिस तरह से बहलाते रहे उसी तरह से फिर बहला दोगे  तुम पर  तरह विश्वास कर लुंगी और उस विश्वास ऐतबार   पूंजी मान कर सहेजे रहूंगी सही में ...
शकों कभी चैन तो लेने  दिया करो सनम मुस्कान कभी खुलकर मुस्कुरा नहीं पाती है कभी कभी लगता है कि मैंने तो सच्चा प्रेम किया और तुमने चाहें जो भी किया नहीं जानना चाहती लेकिन मेरे जिस्म से कोई जान खींचे लिए जा रहा है ऐसा महसूस होता है सीधा कलेजे को चीरता हुआ कोई तीर पार हुआ जाता है सुनो न तुम मुझे यह बता दो कि तुम्हें किस बात कि कमी थी या कौन सा वो लालच था या कौन सी तलाश थी या क्या पाने की चाह थी जो तुम मुझे साथ रखकर भी किसी और को भी गले लगते रहे मान जाओ अभी भी वक्त है कहीं ऐसा न हो कि तुम्हारे पास कुछ भी न बचे प्रिय क्या तुम्हे पता नहीं चलता या तुम्हें अहसास नहीं होता है कि मुझे किस दर्द और तकलीफ से गुजरना पड़ता है मैं चीखती हूँ चिल्लाती हूँ दर्द से तड़पते हुए खुद को ही कष्ट देती हूँ कभी अपना हाथ काट लेती कभी अपने सर को दीवार से टकराती हूँ फिर भी चैन नहीं आता सकूँ नहीं आता सनम मैं मैं इस दुनिया में रहकर भी इस दुनिया की नहीं रही बेगानी हो गयी मैं हूँ सबसे ,कभी सोचा है तुमने अपने खुद के  बारे में प्रिय तुम इस दुनिया के सबसे प्यारे इंसान हो और भोले भी तुम नहीं जानते कि सब बहुत स्वार्...
आज फिर तुम पर प्यार आया है बेहद और बेशुमार आया है  सच में यह मन बावरा ही होता है कि तुम्हारी झलक देखने भर से मन का गुबार कहीं दूर हवा में उड़ गया, नफरत की आंधी मुंह छिपकर गायब हो गयी और दिल में रह गया तुम्हारे लिए प्रेम सिर्फ प्रेम ,हाँ यही तो सच है कि हम जरा देर में अपनी सब नफरत और घृणा को मिटा देते हैं ! सुनो न प्रिय क्या तुम्हें इस बात का अहसास नहीं होता है कि हमें तुमसे बात करना अच्छा लगता है तुम्हारे साथ रहना अच्छा लगता है अपने मन की हर बात तुमसे कहकर हल्का होना भी अच्छा लगता है ,शायद तुम भी ऐसा ही सोचते हो न, तभी तो थोड़ी सी आहट पर ही तुम आ जाते हो और मुझे मेरे कष्टों से उबार लेते हो  , सब दुःख दूर हो जाते हैं और मन में ख़ुशी की लहर दौड़ जाती है तपते हुए तन पर मानों शीतल फुहार पड़  जाती है, मानों ईश्वर स्वयं ही हमें आशीर्वाद देने को आ गए है हमारे सर पर आशीष भरा हाथ रख दिया हो, सच में कितना ताज्जुब सा लगता है कि कैसे भगवन भी हमारे दुःख में दुखी और सुख में खुश हो जाते हैं और यह तभी संभव होता है जब हम सच्चे और ईमानदार होते हैं अपने रिश्तों को पारदर्शी रखते हैं ,मैं जान...
 नम आँखों की नमी कभी कम नहीं होती इनमें ख्वाब ही इतने  तैरते हैं आज मैं बहुत  उदास हूँ पूरा दिन मन पर उदासी के बादल मंडराते रहे, आँखों से आंसू बहते रहे लाख कोशिशों के बाद भी चेहरे पर नाममात्र की मुस्कान नहीं आयी, न जाने कहाँ से इतना दर्द दिल में समां गया है कि हंसने मुस्कुराने का मन ही नहीं करता है, क्या करूँ मैं ऐसी ही हूँ और कितना बदलूंगी मैं, बिलकुल ही बदल लिया खुद को ,  तुम्हारे सांचे में ढल गयी.    मेरे में मेरे जैसा कुछ नहीं बचा है बस मुझे इतना पता है कि मैं चाहें कैसी भी रहूं तुमको कोई फर्क नहीं पड़ने वाला कभी भी नहीं बस तुम मुझे कहते रहो कि  ऐसा मत करो वैसा मत करो न जाने कितनी बंदिशें लगा दी कभी सोचा है तुमने कि मोहब्बत और गुलामी में अंतर होता है लेकिन तुम कहाँ समझोगे और कैसे समझोगे  जबकि तुमने कभी समझने की कोशिश ही नहीं की और शायद कभी समझ कर करोगे भी क्या ?  है न?  वैसे मैं सच में एक बात नहीं समझ पा रही हूँ कि मेरे मन में मेरे दिल में तुम्हारे लिए इतनी शिकायतें क्यों आ गयी हैं ? क्यों मैं तुम्हें गलत समझने लगी हूँ ? क्...
ज़िंदगी खूबसूरत है  मगर झूठ है  वफ़ा प्यार इश्क भरम है सिर्फ भरम ,,,  कभी कभी मन सोचता है कि मैं भी कितनी मुर्ख हूँ वाकई  पूरी बुद्धू ,  तभी तो इतना विश्वास करने लगी खुद से भी ज्यादा लेकिन  कभी सोचती हूँ कि जब\ज़िंदगी ही बेवफा है  एक दिन साथ छोड़  देती है तब किसी पर कितना भी भरोसा करो वो  तोड़ ही देता है लेकिन यह सब बातें दिल नहीं समझता  है उसे  बेहद दुःख होता था , बहुत दर्द भी होता है और फिर दुनिया से ही विश्वास उठ जाता है कुछ भी अच्छा नहीं लगता है कोई भी अच्छा नहीं लगता है हर कोई झूठा और फरेबी नजर आने लगता है एक एक बात आँखों के सामने से गुजरती है किसी चलचित्र की ा तरह और सारे भ्रम दूर हो जाते हैं याद आती है तो वे दुःख वे कष्ट जो जान बूझकर तुमने दिए वे शब्द मानों आत्मा को चीरते चले जाते हैं जो तुम कहते थे सच यह दिल सबकुछ समझता है जानता है इसको किसी भी तरह से बहलाया नहीं जा सकता है न किसी  तरह से समझाया जा सकता है क्योंकि मेरा ऐसा मानना है कि अगर हमारा मन सच्चा है तो वो कभी गलत बात को स्वीकार ही नहीं करेगा कभी भी नहीं , ...
जिंदगी में तुम हो और ज़िंदगी ग़मगीन है अय सनम क्यों प्रेम करती हूँ तुम्हे इतना   प्रिय सुनो                 तेरी चाहत के सिवाय और  कोई कोईचाहत  नहीं रही कभी मेरी फिर 
ओ  मेरे प्रेम के देवता तू ही तो प्रेम है मेरा तेरे लिए ही अपना जीवन बार दिया है सुनो प्रिय              आज रात को जब तुम्हारा जन्म होगा न कन्हैया तब दुनिया के सारे तम मिट जायेंगे और बिखर जाएगी प्रेम की ख़ुशी की जीवंत रौशनी ,,,तुम तो  जानते ही हो न  दुनिया में कितने गम है दर्द हैं और तकलीफें हैं , सब जीना चाहते हैं लेकिन उनको मरना पड़ता है जीने के लिए मरते हैं फिर भी अपनी पसंद से अपनी ख़ुशी से जी नहीं पाते हैं चाह कर भी नहीं,  क्यों होता है ऐसा? न जाने क्यों ? यह सवाल हमेशा मेरे मन में गूंजता रहता है कि हमारा जीवन तो हमारा होता है तो फिर हम उसे अपने हिसाब से क्यों नहीं जीते हैं?  क्यों हम दूसरों के तरीके से जीवन बिताने को विवश होते हैं ? न जाने कब मुझे मेरे इस सवाल का जवाब मिलेगा ? कब मुझे सिर्फ अपने तरीके से जीवन जीने को मिलेगा या जैसा मैं चाहती हूँ या जैसा मैंने जीना चाहा ,,,वो कभी भी नहीं हुआ या शायद कभी होगा ,  कैसे मन ख़ुशी से लबरेज  होगा?   उत्साह और ऊर्जा से भरा हुआ लेकिन मुझे उम्मीद है  वो दिन...
मेरी ख्वाहिशें तमन्नाएं और कामनाएं यूँ ही तो  नहीं हैं कि प्रेम की हर  तकलीफ को ख़ामोशी से सहा है  मैंने । .... सुनो        मैं नहीं चाहती कि  मेरी  कोई भी परेशानी तुम को छू भी सके बस इसीलिए ही सारी तकलीफें मैं अकेले  सहती रही   और तुम्हें तकलीफ में देखकर चुपके चुपके रोती रही ,,,सनम न जाने वो कौन सी  बात थी कि जो तुम अपने उसूलों से दूर  हुए भटके और फिर उस गलत को सही करने के लिए खुद की ही  नजरों में खुद को गलत   ठहराते रहे सबकुछ जान समझ कर भी तुम उस गलती को सबसे छुपाने की कोशिश में लगे रहे जबकि एक गलत इंसान हमेशा ही दूसरों को गलत कहता है  नीचा दिखाता है वो कभी भी नहीं चाहेगा कि कोई भी आपका सम्मान करे आपको अच्छे स्थान पर रखे बस इतनी सी बात को आपने  समझ कर भी समझना नहीं चाहा आखिर क्यों और किसलिए ,,,, प्रिय  तुम एक सच्चे और प्यारे  इंसान हो और रहोगे भी मेरा यह विश्वास आखिरी पल  तक कायम रहेगा इसे कोई भी तोड़ नहीं सकता ,तुम स्वयं भी नहीं हाँ सनम तुम भी नहीं। ...  अप...
यह दर्द है ख़ुशी है या प्रेम छलक आया है बह रहा है आँखों से न जाने क्यों न जाने क्यों सुनो  आज सच में समझ नहीं आ रहा है कि क्यों बहने लगी है मेरी आँखों में नमी और क्यों दिल भरा आ रहा है कितना भी समझा लो अपने मन को लेकिन बहुत ज्यादा उदास है बहुत ही ज्यादा,  मुझे क्यों आज इस तकलीफ का अहसास हो रहा है , सनम तुम्हारे सिवाय किसी और के बारे  में सोच ही नहीं पाती किसी और के साथ बात करूँ मन  बेचैन सा हो  जाता है जैसे कि बस तुम्हारे लिए ही मैं बनी हूँ किसी और से कोई वास्ता ही नहीं है और तुम्हारी हर ख़ुशी में निसार हूँ क्या तुम्हारा मन भी ऐसा ही करता है क्या तुम भी मुझे यूँ ही याद करते हो वैसे सच तो यही है कि तुम भी मुझे उतना ही प्रेम करते हो जैसे मैं तुम्हें करती हूँ तभी तो मन बेचैनी से भर जाता है दर्द से तड़प जाता है और फिर कुछ भी अच्छा नहीं लगता है न यह दुनिया न ही दुनिया की बातें ,क्या करूँ अब मैं कि एक बार तुम्हें अपने मन की उदासियाँ बेचैनिया बता दूँ और तुम्हारी सब सुन लूँ जिससे तुम्हारे मन को भी तसल्ली हो जाए और यह दर्द गम उदासी बेचैनी सब कहीं दूर छूमंतर हो जाए ...
कोई साया सा मेरे   हमेशा साथ रहता है वो तुम हो सिर्फ तुम  हाँ सिर्फ तुम ही। ..  सुनो जब मैं  तुम्हें याद करती हूँ न तो तुम्हे  याद नहीं करती बल्कि खुद को भुला देती हूँ सनम तुम्हें  याद करने का मतलब ही खुद को भुला देना है खुद को खो देना है और जब मन की सच्ची लगन तुमसे लगी है तब क्या खुद को याद रखूं और कैसे याद रखूं ? अब प्रिय तुम ही बता दो मुझे कि प्रेम में किस तरह से खुद को बचाये रखूं मैं जब मैं कुछ बची  ही नहीं जो कुछ हो वो सिर्फ तुम ही तो हो ,,,,,  बड़ा अजीब सा लगता है न कि खुद का कुछ भी न होना या खुद को मिटा देना ,लेकिन यही सच है प्रिय कि तुम्हारे लिए या अपनी ख़ुशी के लिए मैं वो सब करुँगी जो तुम चाहते हो या जैसा तुम चाहते हो बिलकुल  वैसी ही बन जाउंगी क्योंकि प्रिय मैं तुम्हें चाहती हूँ और तुम्हें चाहना मतलब दुनिया की सारी खुशियों से   अपना दामन भर लेना और मैं यह बात ाख़ूबी जानती हूँ कि तुम मुझे मुझसे भी ज्यादा चाहते हो मेरी ख़ुशी के लिए खुद  को निसार कर देते हो और बिलकुल मेरे जैसे बनकर मेरे लिए खुद को मिटा देत...
तुम तो सनम वाकई में कमाल करते हो प्यार करते हो या मजाक करते हो। ... सुनो         तुमसे तो हार ही गयी हूँ अब मैं क्योंकि तुम एक ऐसे इंसान हो जिसे अपनी जीत अपनी अकड़ अपने अहंकार से बढ़कर कुछ भी अच्छा नहीं लगता है लेकिन प्रिय तुम यह क्यों भूल जाते हो कि अगर मैं तुम्हें प्रेम करती हूँ तो तुम भी मुझे उतना ही प्रेम करते हो और मेरे बिना तुम भी कुछ नहीं जैसे मैं तुम्हारे बिना कुछ नहीं हूँ ,,,प्रिय किस तरह से मन को समझा या बहला लेते हो तुम मेरा तो दिल इतना भर आता है कि जी चाहता है मैं तुमसे अभी इसी वक्त बात करूँ और अपने मन की सब कह कर हलकी हो जाऊं और तुम्हारी सब सुन भी लूँ जिससे तुम्हारे मन की गलत भावनाये मिट जाएँ लेकिन फिर किसी तरह से सब्र का दामन धाम लेती हूँ कि चलो कोई बात नहीं ,,,कहते हैं न कि जात न सब दिन एक समान ,,,,अभी मैं तुम्हारा इंतजार करती रहती हूँ हो सकता है कल को तुम मेरा इंतजार करते रहो क्योंकि आज तुम्हारे दिन हैं कल मेरे होंगे इसलिए संभल जा धीर रख ो अधीर मन सब सही हो जाएगा  एक दिन और तुम मुझे अपनी जान से ज्यादा चाहने लगोगे जैसे पहले चाहते थे मे...
जानती हूँ मुश्किल होता होगा तुम्हें यूँ मेरे बंधन में गर तुम समझ सको तो समझो कि आजाद हो तुम सुनो       सिर्फ तुम ही तो हो  जिसे मैं दिलो जान से प्रेम करती हूँ और मैं बिलकुल भी नहीं चाहती कि तुम्हें कण मात्र भी  कष्ट हो क्योंकि तुम्हें जरा भी तकलीफ मेरी जान निकाल देती है और   मैं  नहीं चाहती मैं अल्पायु में मर जाऊं  मैं जीना चाहती हूँ जी भर कर जीना चाहती हूँ और तुम्हारे साथ जीवन के सारे सुख लेना चाहती हूँ तभी तो तुमसे दूर रहकर भी हमेशा तुम्हारे ख्यालों में रहती हूँ इस तरह से दूर रहकर करीब हो जाती हूँ लेकिन प्रिय मैं तुम्हारे इतना करीब रहना चाहती हूँ कि अगर तुम स्वांस भी लो तो मैं उसकी गर्मी को महसूस कर सकूँ ,तुम इतने करीब रहो न प्रिय कि मैं तुम्हारी एक एक धड़कन को सुन सकूँ , मुझे नहीं पता है कि ईश्वर हमारी इतनी परीक्षाएं क्यों लेता है ,क्यों इतने दुःख देता है क्यों नहीं हम सुख को जी  पाते हैं क्यों हम दुःख के भवर में अटक जाते हैं क्यों दिल भरा भरा रहता है और क्यों आंसूं थमते नहीं हैं औार जी चाहता है कि मेरे पंख आ जाएँ ता...
तुमसे कभी कुछ गलत कहना मेरी ही तौहीन है सनम मगर मेरी आँख नम है बहुत ही नम है सनम। ... सुनो जब भी तुमसे कुछ कहना चाहती हूँ तभी मेरा मन कहता है कि जबी तुमसे कहकर तुम्हें तुम्हारी गलती का अहसास कराया तो क्या फायदा तुम्हें तो स्वयं ही अपनी गलतियों का करनियों का अहसास होना ही चाहिए और तुम्हें खुद ही होगा अहसास एक दिन तब तुम्हें समझ आएगा कि तुम गलत थे और अपनी गलतियों को सही बताने का काम ताउम्र करते रहे लेकिन प्रिय प्रेम की भाषा तो तुम कभी नहीं समझ सकते क्योंकि तुम्हारे मन में कोई सच का भाव ही नहीं है न कभी था न कभी होगा अगर होता तो मेरी बहते हुए अश्क और मेरे रट तड़पते हुए दिल की पुकार तुम तक जरूर पहुँच जाती  भी उतना ही तड़पते जितना कि मेरा दिल तड़पता है। ...खैर सनम क्या कहूं अब मैं मुझे तो  हमेशा ही रुलाया तड़पाया और अपनी ख़ुशी के लिए   न जाने क्या   क्या किया  पर एक बात याद रखना तुम यह जो  मेरे आंसू बाह रहे रहे हैं न  इनका कर्जा तुम पर चढ़ता जा रहा है पता नहीं कैसे  उतारोगे यह कर्ज ,वैसे मेरे सनम तुम्हारी तो नस नस मेरी कर्जदार है तुम ...
न इंसान बचे हैं न इंसानियत बची है हर रिश्ते में देखो बेईमानी भरी है सुनो priy  क्या दिल के rishton में कभी कुछ कहने या sunne की jrurat होती है नहीं न फिर तुम खुद socho मैं तुम्हारे हर ankahe को कैसे सुन और समझ लेती हूँ कैसे जान जाती हूँ तुम्हारी हर बात और जब सही नहीं जाती तो खुद को ही takleef pahucha लेती हूँ खुद को दर्द के athah सागर में डूबा कर कर तुम्हें आजाद karti हूँ की आजाद रहना ही तो तुम्हारा शगल है की dhokha dena और khel khelna ही तुम्हारे man को pasand है lekin priy ek बात समझ नहीं aati की तुम aakhir mere sath beimani कैसे कर lete ho jabki maine तो तुम्हारे liye खुद को mita diya mujhe dhokha कैसे दे sakte ho jabki maine samrpan की हर seema को langh diya sirf तुम्हारे sibay meri duniya koi नहीं कुछ bhi नहीं फिर कैसे aakhir कैसे jhuth bol paate ho mujhse aakhir तुम खुद को ही daga कैसे दे paate ho कैसे apne man को dilasa dete hoge तुम जब meri aankhen dariya की tarah bahti है belagam hokar batao न priy bolo n कैसे aakhir कैसे ????? seema aseem