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Showing posts from September, 2020

पहाड़

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 पहाड़ बड़े कोमल होते हैं  इन से बहती है प्रेम धाराएं   ग्लेशियर के रूप में दूर से लगते हैं  निष्ठुर कठोर  करीब से जाकर देखो   तो समझ आते हैं बडे  गुणकारी होते हैं  फूल फल और औषधियों से भरे  यह हरे भरे पहाड़  उन्नत मस्तिष्क उठाए खड़े हुए   अटल अडिग मेरे प्रिय पहाड़...  सीमा असीम 

प्रेम में

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  वे  दोनों में  प्रेम थे  पर कहते नहीं थे कभी  वे कभी  फूल भेजते  और कभी उपहार  नए नये  नाम रचते एक दूसरे का  वे  याद करते और बातें भी करते  वे बार बार साथ चलने को आतुर होते  एक दूसरे की बाहों में बाहें डाल कर   दिन गुजरते जाते आस बढ़ती जाती  यूं ही दिन बीतते रहे  वे खुद से ही हँसते मुस्कुराते बतियाते   बारिश में भीगते  फूलों संग महकते  ओस सा नम होते  किसी पेड़ के तले बैठे रहते  घंटों यूं ही सोचते हुए कि  उन्हें इतना यकीन था  वे मिलेंगे  बार बार मिलेंगे  मिलते रहेंगे  सदियों तक  फिर फिर बिछुड्ने को  क्योंकि वे प्रेम में थे  अद्भुत अनोखे सच्चे प्रेम में ...... सीमा असीम  29,9,20 

चाँद

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 कितना करीब लगता है कभी यह चाँद   इतना करीब कि हाथ बढ़ाओ और छू लो  बिठा लो अपने पास में  कर लो मन की ढेर सारी बातें  कुछ कह लो,  कुछ सुन लो और यही चाँद कभी-कभी कितना दूर लगने लगता है  न जाने क्यों इतना दूर दूर सा  कि उसे हम कुछ कह नहीं सकते  उसे हम कुछ बोल नहीं सकते  उसे हम कुछ सुना नहीं सकते और  हम उससे कुछ सुन भी नहीं सकते  न जाने क्यों वह हमें इतना दूर लगता है?    यह चाँद ज़ब मुस्कुराता है तो कितना प्यारा लगता है  चारों तरफ बिखर जाती है एक उज्जवल आभा  हर तरफ से आने लगती है रोशनी  मन में चमक और खुशी जैसा माहौल पैदा हो जाता है  ज़ब गुस्सा करता है चाँद तो   घिर आते हैं पानी भरे बादल  कालिमा छा जाती है  हर ओर अंधेरा हो जाता हैं  तब उसकी आंखों में कोई पवित्रता नहीं होती है  ऐसा चांद अच्छा नहीं लगता है ना  अच्छा लगता है वो सिर्फ हंसते मुस्कुराते गाते  बतियाते हुए  कुछ कहते हुए और कुछ सुनते सुनाते  हुए....   सीमा असीम

पीहू हमारी

   दौड़ी-दौड़ी फिरती है  पल भर नहीं ठहरती है  कभी पहनती लहंगा चुनरी  कभी फ्रॉक पहनती है  नाना नानी की बेटी रानी   दादा दादी की राज दुलारी   मम्मी पापा जान छिड़कते   घर भर को वह लगती प्यारी  इतनी सुंदर छोटी छोटी आंखें  ख्वाब चमकते उसमें रहते   होठों पर  लाली प्यारी   बातों से लगती है वह कितनी प्यारी कितनी भोली   खाने में बड़े नखरे करती खाना नहीं वो खाती  दूध को तो वह ना हाथ लगाती   चॉकलेट टॉफी लाइम जूस जेम्स पर फिसलती  कितना मनाओ कितना वहलाओ पर वह कभी किसी की बातों में ना आती  अभी तो बहुत छोटी है  1 दिन बड़ी बनेगी  पूरी दुनिया में नाम रोशन करेगी  सब को बहुत खुशी देगी  उससे प्यारी कोई नहीं है  सबसे प्यारी पीहू हमारी  सबसे न्यारी पीहू हमारी  सबसे सुंदर सबसे प्यारी  पीहु  हमारी  पीहू हमारी  आज बेटी डे पर बेटियों के लिए प्रस्तुत है कविता

वो

पंछी

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   चहचहाते हुए पंछी अँधेरे से ही निकल पड़ते हैं  अपने  हौसलों से  अपने घोंसलों से  बेफिक्र होकर ऊँची  उड़ान भरते हुए  वे न किसी डर से ग्रसित हैं  ना किसी भय से  उन्हें नहीं पता कि महामारी कहां फैली है  वे स्वतंत्र है  वे आजाद है  खुली हवा में सांस ले रहे हैं  उन्हें जरूरत नहीं है किसी मास्क की   सैनिटाइजर की  फेस कवर की  वे तो बस अपने हौसलों के साथ उड़ रहे हैं  उची उची उड़ानों से   छू रहे हैं नभ को और  आकाश को...... सीमा असीम 

आस

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  मैं खुश हूँ बहुत खुश कल से ही  फिर क्यों रात को आँसू बहने लगे  प्रेम के रंग अजब हैं  सुख में आँसू  दुख में आँसू  प्रेम का सच्चा साथी है दुख  प्रेम में कभी कहाँ मिला है सुख  फिर एक आस मन में पल गयी है कि  दुख अब सुख में बदलेंगे  संग संग कुछ दूर चलेंगे  चिड़ियों सा मन चहक पड़ेगा  जीवन में  जीवन जीने को मिलेगा  मन का उपवन महक उठेगा  पत्तों पत्तों और डाली डाली पर  सुंदर सा पंछी डोलेगा  मीठे फलों का स्वाद चखेगा  उसका मन कितना खुश होगा  सोच सोच कर मन मुसकाया  आँखों के कोरों पर सुंदर सुखद स्वप्न सजेगा  महक उठेगा  खुशियों के पल में  सारा तन और सारा मन ....... सीमा असीम  15, 9, 20  ,

शाश्वत है

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 प्रेम शाश्वत है  यूं ही तो नही कहा जाता कि प्रेम शाश्वत है   प्रेम  को ना तो घटाया जा सकता है और  ना ही मिटाया जा सकता है  ना खत्म किया जा सकता है और  ना ही मारा जा सकता है  अगर प्रेम है  तो ताउम्र प्रेम रहेगा कभी खत्म नहीं होगा  ना कम होगा  ना ज्यादा होगा ना कभी स्वार्थी होगा  ना कभी प्रेम झूठा होगा   अगर प्रेम हुआ तो हुआ है अगर  मन किसी का हुआ  तो हुआ है   कभी मन को बदला नहीं जा सकता  मन को कभी मारा भी नहीं जा सकता   प्रेम भरा मन कभी नहीं मरता  एक जोत सदा जलती रहती है  विश्वास की......  सच्चा प्रेम हमेशा प्रेम ही रहता है  कभी भी बदलता नहीं क्योंकि  प्रेम शाश्वत होता है  सीमा असीम  9,9,20 

गुनाह

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 आपके गुनाह   आपके शोर मचाने से  चीखने से चिल्लाने से कभी कम नहीं होते  आप गलत हो अगर तो गलत ही हो  चाहे आप कुछ भी कहो  सामने वाला अगर कुछ भी ना कहे  तब भी पता चल जाता है कि  वह सच है या गलत  अगर वह चीख रहा है  चिल्ला रहा है  तभी पता चल जाता है कि वह सच है या गलत  दुनिया में इतनी शक्ति ईश्वर ने हर इंसान को दी है कि  वह समझ सके कि जो उसके साथ हो रहा है या  जो उसके साथ कर रहा है  वह गलत कर रहा है या सही कर रहा है  कुछ समय तक तो इंसान की सब चीजें चल जाती है  लेकिन उसके बाद धीरे-धीरे वह  चीजों को समझने लगता है और  गलत को गलत और सही को सही  डिफाइन कर सकता है  भले ही वह ना कहें  अगर वह नहीं कहता है  इसका मतलब यह नहीं कि  वह जानता नहीं है कि सच क्या है अगर  वह कहता है इसका मतलब यह भी नहीं  कि वह जान गया है कि सच क्या है  इसलिए चुप रहो खामोश रहो  बस देखते रहो दुनिया में क्या हो रहा है  क्या चल रहा है  आप करो वही जो आपका दिल कहता है  जो आ...

ग़म

  शाम-ए-ग़म की सहर नहीं होती,  या हमीं को ख़बर नहीं होती   हां वही तो लगता है कि कभी सुबह होती ही नहीं है जबकि देखो सुबह हो गई है दिन निकल आया है सूरज निकल आया है,  चारो तरफ रोशनी बिखरी पड़ी है, मन में एक दिया तो जल रहा है लेकिन फिर भी अंधेरा है,  चारों तरफ अंधेरा,   कुछ समझ नहीं आता,  किधर से रास्ता निकलेगा,   वह तुम्हारे पास तक जाएगा,  कैसे तुम तक पहुंचाएगा और कैसे तुम्हें मेरे  प्रति पूर्ण समर्पित कर देगा.....  सीमा असीम  8, 9, 20

दुःख

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 अरे दुख सुन तो जरा  तू कितना प्यारा लगने लगा है  मुझे आज कल  तू कितना प्यार करने लगा है  मुझे आजकल  चिपका रहता है गले से और  दिल में दर्द जगाए रहता है  पल भर को भी तो तू दूर नहीं होता है  आंखों में नमी देख कितनी बार भर  जाता है  सोचती ही नहीं मैं अब दुःख के सिवाय कुछ और  आंखें देखो ना कितनी बहती है दर्द से   इनमें से नमी कभी कम नहीं होती   मानो कोई सागर भर दिया है तूने  दुख तू सच में सागर है या  सागर से भी गहरा है  तू कितना प्यारा है जो तू  हमेशा मेरे साथ चिपका रहता है  छोड़ता ही नहीं है मुझे  ना करता है मुझे कभी सुख के हवाले  चेहरे पर मुस्कान खिलाने नहीं देता  हाँ  देता है न तू मुझे ख़ुशी  उदासी,  निराशा और दर्द   अपने इन प्यारे साथियों को चेहरे पर सजाए रखता है  तू मेरा ऐसे साथ निभाये जाता है हरपल में हरदम भी...  सीमा असीम  7, 9, 20

पंख

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मन में अजीब सी बेचैनी है  बेतहाशा तड़प है  रोम रोम में अजीब सी प्रतिध्वनी उठ रही है  कितनी आवाजें आसपास गूँज रही हैं  और मैं अपने ही भीतर डूबी हुई हूँ   सुन रही हूं अपने मन की पुकार कि  आज उग  जाए मेरे पँख और  मैं उड कर पहुंच जाऊं तुम्हारे पास  लगाकर तुम्हें अपने गले से  भूल जाऊं दुनिया को  जैसे अभी भूली हुई हूं  उससे भी कहीं और ज्यादा,,   बस याद रह जाओ सिर्फ तुम  सिर्फ तुम... सुनो   उगा दो न मेरे पंख  सुंदर सजीले रंगीले   तुम तक आने को  बिन कहे सब कह जाने को सीमा असीम  6, 9, 20

अपने

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 पल भर को भी ज़ब अकेले में बैठती हूं  सोचती हूं तो उदासी घिर जाती है  क्या अपने के बगैर भी कोई जी सकता है  क्या अपनों के बगैर भी कोई रह सकता है  अगर अपने ना होते तो इस दुनिया में  ना होती है  खुशियाँ  ना इतनी सुंदर होती दुनिया  ना इतनी खूबसूरत होती  ना इसमें इतना अपनापन होता  ना इसमें कभी जीने का मन होता  अपने है तभी तो जीवन है  अपने हैं तभी तो खुशियां हैं  अपने है तभी तो दिल लगा रहता है  वरना उदासी है  आंसू है  दुख है  दर्द है और  कुछ नहीं  अपनों के बिना दुनिया में कुछ नहीं  अपनों से कभी बिछड़ कर देखो  पल भर में तड़प जाओगे  पल भर में लौट के आ जाओगे  अपनों से बात करके मन को खुशी मिलती है  मन भटकता नहीं है  जो होते हैं अपने अपनों के जैसे  तो नहीं भटकता है मन  ना होता है कभी बेचैन  है अपने है तो बस अपने  अपने तो अपने होते हैं  सीमा सीमा 6, 8, 20

सत्य

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 आप तमाम उम्र सत्य की खोज में रहते हैं  सत्य को जानना चाहते हैं  अपने सत्य नहीं  दूसरों के सत्य और  दूसरों के सत्य के लिए  अपने सत्य को खत्म कर देना चाहते हैं  हम भूल जाते हैं कि हमारा जो सत्य है  वह सिर्फ हम जानते हैं  दूसरों  का सत्य तो सिर्फ वही जान सकता है  हम उसके सत्य को नहीं जान सकते  जैसे वह हमारे सत्य को नहीं जा सकता  किसी भी कीमत पर किसी भी हाल में  रे मन काहे न धीर धरे.....  सीमा असीम