प्यार आ गया है
मन को आजकल सकूं सा है बेकरार मन को करार आ गया है ना जाने ऐसा क्यों हुआ है क्या तुझको मेरा प्यार याद आ गया है जो दिल बेकल हो याद में तड़पता मचलता रहता था पल भर के सुकून नहीं था दिल को मेरे आज वही दिल खुशी से लवरेज है क्या तुझे मेरे इंतजार का ख्याल आ गया है जिसके लिए दिन रात माला जपती दुआएं करती रहती क्या कबूल हो गयी हैं मेरी दुआएँ जो मुझे चैन आया और मन मगन हो शायद मेरा विश्वास लौट आया है बस अब तू एक मेसेज तो कर या फोन ही कर ले कि तेरे सौ ख़ून माफ़ हैं जी जाऊँगी जैसे ऐसे तन में आये हैं प्राण और वापस मेरा प्यार आ गया है... सीमा असीम