यूं ही अचानक जब किसी से आपको मिलने को बात करने को दिल मचलने लगे तो यकीनन वह भी आपको ऐसे ही याद कर रहा होगा ऐसे ही मिलने को बात करने को तङप रहा होगा क्योंकि कहते भी है ना दिल से दिल को राह होती है और जब तार आत्मा की गहराई से जुड़े हो तब तो यही सच होता है तेरे बिना जिया जाये न.... सीमा
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आज पूरा दिन घर में बैठे-बैठे मन बहुत उदास हो रहा था बच्चे भी सब चले गए दोनों बेटियां अपनी ससुराल और बेटा नौकरी पर आज चार दिनों से गया हुआ है मन नहीं लग रहा है घर में हालांकि आज तो शादी में भी जाना है इंजॉय करना है खूब सारे मेकअप लगा के नए-नए कपड़े पहन कर वहां पर सबसे मिलना जुलना होगा लेकिन चलो थोड़ी देर घूम आते हैं ऐसे चेहरे पर अलग सा गला आ जाएगा जो उदासी दिनभर घर में पड़े पड़े हो गई है ना वह काम हो जाएगी तो जब गला आएगा ना चेहरे पर बाहर निकाल कर टहल के आने के बाद उसे पर मेकअप किया जाएगा तो अलग ही सुंदरता दिखेगी ऐसा ही सोच कर वह अपने पति से होली चलो ना कहीं घूमता आते हैं थोड़ी देर कहां चलोगे अभी 1 घंटे बाद तो तैयार होकर शादी के लिए निकलना है कहां अभी कहां अभी तो 5:00 है और हम लोग 9:00 बजे से पहले कहां शादी में जाएंगे यह तो है लेकिन मेरा मन नहीं है तुम जाना चाहो तो तुम चली जाओ चलो अच्छा फिर मैं ही होकर आता हूं अक्सर अकेले ही तो चली जाती थी कभी ऐसा तो नहीं है इस साथ में ही जाना होता था और अक्सर अकेले निकल गई घूमने के लिए थोड़ी दूर खुली हवा में सांस ले आई बंद घर में घुटन भी तो हो जाती...
असीम दुःख दर्द
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मुझे बस इतना पता है कि तुम किसी बात की परवाह नहीं करते हो, ना किसी से डरते हो, खुद गलत होते हुए भी खुद को हमेशा सही कहते हो, ना जाने क्यों किस लिए और आखिर किस वजह से, जो शहनशाही अपने लिए मन में पाल रखी है कि जो तुम हो वही सही है या जो कुछ भी तुम करते हो बस वही सही है या फिर जो कुछ भी तुमने किया बस वही सही है लेकिन तुम्हें एक बात बताऊं ऐसा नहीं होता है, खुद से भी बढ़कर एक शक्ति है जो सब कुछ देखती है, सब कुछ जानती है और सब कुछ समझती है, वह अभी सजा नहीं आपको दे रही है लेकिन समय आने पर उस सजा को तुम्हें भुगतना पड़ेगा, उस अंजाम को तुम्हें हर हाल में सहना पड़ेगा, जीना पड़ेगा तड़प तड़प कर, तुम्हें इस तरह से जैसे वह तुम्हें जीने की परमिशन देगा, इजाजत देगा सिर्फ वही तुम्हें करना होगा, तब तुम्हारी इच्छा से कुछ नहीं होगा या तुम्हारी मानने से, समझने से भी कुछ नहीं होगा, होगा वही जो कि वह सत्ता चाहती है, जो अलौकिक है अद्भुत है अचंभित कर देने वाली है और मेरा यकीन है कि वह सत्ता है और वह आज नहीं तो वक्त आने पर तुम्हें उसे अंजाम तक जरूर पहुंचाएगी जिस अंजाम के तुम हकदार हो या तुमने जो कुछ भी किया है...
प्रेम
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प्रेम के लिए लोगों ने न जाने किया महल बनाये दुमहल बनाये और दुनिया में अजूबे भी बनाकर खड़े कर दिए लेकिन तुमने क्या किया डुबा दिया मुझे इस कदर कि उबरने का नाम ही नहीं है बताओ कोई प्रेम को सर का ताज बना लेता है और तुम जैसा कोई प्रेम को गर्त में डुबा देता है शायद तुम स्वार्थ के वश में न जाने क्या क्या करते रहे खुद को ही खुदा समझते रहे कभी सोचा ही नहीं मेरे बारे में दिया ही नहीं वो सम्मान जिसकी मैं हकदार थी अब क्या ही कहूँ और कितना कहूँ कोई फर्क तो पड़ेगा नहीं न तुम क्या जानोगे प्रेम की ऊंचाइयों क्या होती हैं कैसे प्रेम को निभा लिया जाता है हर गलती को माफ़ कर गले से लगा लिया जाता है काश कि आये तुम्हें सद्बुद्धि थोड़ी ही सही आये और मुझे समझ पाओ साथ ही प्रेम को भी.... सीमा असीम 2,3,25
प्रेम और घृणा
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घृणा और प्रेम का एक ऐसा नाता है जिसे एक दूसरे से कभी अलग किया ही नहीं जा सकता जहां प्रेम है वहाँ घृणा है और जहाँ घृणा है वहां प्रेम है प्रेम के अंदर घृणा घुसी हुई है और घृणा के अंदर प्रेम हम जिसे प्रेम करते हैं उसी से हम घृणा भी करते हैं और जिसे घृणा करते हैं उसी से हम प्रेम करते हैं अधाह प्रेम करते हैं और अधाह घृणा भी न जाने क्यों ऐसा है? लेकिन यही सच है तभी तो मैं तुम्हें जितना प्रेम करती हूं उतनी ही तुमसे घृणा करती हूं और जितनी मैं तुमसे घृणा करती हूं उससे कई कई गुना ज्यादा मैं तुमसे प्रेम करती हूं यही सच है और यह सच कभी खत्म नहीं हो सकता हमेशा रहेगा प्रेम और घृणा का संबंध यूं ही... सीमा असीम 1,3,25
तुम
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तुम जब आँखों को बंद करते होंगे नज़र तो सिर्फमैं ही आती होऊंगी खोलकर आँखों को भी नज़र से तुम्हारी दूर कहाँ होती होऊंगी करते होंगे तुम चाहें जितना जतन पलभर को भी न निजात मिलती होंगी कहो तो मैं तुम्हें न याद करूँ पर यह बात न मुझसे होंगी कि भूलने को तुम्हें मैं याद न करूँ अब तो यह आदत है मेरी और तुम्हारी भी कि न तुम मुझे दूर कर पाते हो न ही मैं भुला पाती हूँ अजीब सी कोई दास्तां बन रही है कि गुल कोई कमाल का खिलेगा यादों को बना कर ताबीज सा जो पहना दिया है तुमने उसमें अब तुम ही बंध गये हो चाह कर भी नहीं मिलेगी मुक्ति और भी ज्यादा जकड़ गये हो बस यही तो है सच और सच्चाई भी न..... सीमा असीम 28,2,24
याद
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न जाने कितनी राते हैं मेरी तुम्हें याद करते हुए गुजर जाती है जानती हूं कि तुम मेरे हो और सिर्फ मेरे ही हो क्योंकि मन जिसके पास है बस वही तो उसका अपना है मेरा मन हमेशा तुम्हारे पास है और तुम्हारा मेरे पास ऐसा हो ही नहीं सकता कि मेरा मन तुम्हारे पास लगा रहे और तुम्हारा मेरी तरफ ध्यान ही ना जाए कितना घबराहट होती है दिन भर में कितनी ही बार जाकर तुम्हें देख लेती हूं और फिर मन को समझ लेती हूं कभी दो बूंद आंखों से छलका लेती हूं और अपनी आंखों की जलन को मिटा लेती हूं अक्सर ऐसा होता है कि पल भर को भूलने की कोशिश करती हूं पर मेरी कोशिश हमेशा नाकाम हो जाती है और तुम्हारी याद मेरे मनमस्तिष्क पर कब्जा जमा लेती है और तुम्हें, मेरा और मुझे तुम्हारा बनाए रखती है यूँ ही सदा या जन्मों जन्मान्तरों के लिए... सीमा असीम 27,2,25