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Showing posts from January, 2021

दर्द

 जब मन अकुलाता  है तो आंखों से बरस जाता है  न जाने कैसी हूक सी उठती है पेट में  फिर कुछ भी समझ में नहीं आता है  बस रोता ही रहता है समझता ही नहीं किसी भी हाल समझता ही नहीं ना जाने कितनी देर तक रोता रहता है सुबकता रहता है किसी की कोई बात याद आती है उसके वह शब्द जो हमारे दिल को दुख देते हैं  या उसकी वे बातें जो बार-बार दिल में दर्द पैदा करती है और हम रोते रहते हैं समझते ही नहीं है समझ आता ही नहीं है होता है होता है ऐसा अक्सर ही होता है मेरे साथ... क्यों दुखाते हैं दिल लोग आपका,क्यों कहते हैं ऐसी बातें जिससे आपके दिल को चोट पहुंचती है? क्यों करते हैं वे काम वे बातें जो आपको अच्छी नहीं लगती और जिसको देखकर आप अपने आप को संभाल नहीं पाते तब सिर्फ रोना ही आपके बस में रह जाता है... और फिर आप हल्के हो जाते हो और माफ कर देते हो उसे बिना कुछ कहे ही... सीमा असीम 1,2,21

तिलक

 हटो हटो हटो दूर हटो, रात को कोई तिलक लगाता है जाओ जाओ किसी और के लगाओ, हम नहीं लगाते तिलक रात को!  बुरी तरह से झिड़क दिया था उस छोटे से मासूम बच्चे को एक गरबीले, घमंडी,नकचढे इंसान ने, यह देखते ही मेरे मन में एक अजीब सी बेचैनी सी पैदा हो गई उस बच्चे के लिए मन में दर्द भरा आया और आंखों में हल्की सी नमी भर गई!  कोई ऐसा कैसे कर सकता है किसी के मन में किसी के प्रति इतना दुर्भाव कैसे हो सकता है? क्या गलती है उसकी वो माथे पर तिलक ही तो लगाना चाहता है जब आप रात को मंदिर जा सकते हो तो तिलक रात को क्यों नहीं लगा सकते अनेकों सवाल मेरे मन में उमड़ने लगे!  वह भी तो एक इंसान ही है, माना कि वह इतना सक्षम नहीं है तुम्हारी तरह धन दौलत से भरपूर नहीं है तुम्हारी तरह, लेकिन खाता तो वह भी रोटी ही है, हो सकता है  जो तुम मक्खन या घी में भिगोकर रोटी खाते हो और वह नमक से सूखी रोटी खाकर गुजर कर लेता है!  सुबह ही निकल पड़ता होगा चंदन की कटोरी लेकर के मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के माथे पर तिलक लगाकर कुछ पैसे कमा लेगा, हर कोई पैसे कमाता है कोई  पैसे तिजोरी भरने को कमाता है और...

बांसुरी

 मंदिर की सीढ़ियों पर बैठकर वह दिनभर बेचती है मोर पंख लगी बांसुरी  कुछ बिक जाती है और कुछ रह जाती हैं  कुछ लोग खरीद लेते हैं प्यार से उसे पूरे पैसे दे देते हैं  और कुछ मोलभाव करते हैं और फिर खरीदते भी नहीं छोड़ कर चले जाते हैं  कुछ लोग उसे झड़प देते हैं हटो हटो नहीं चाहिए  दिन भर मेहनत करने के बाद बमुश्किल कुछ कमा पाती होंगी ₹10 की बेच के एक बांसुरी है न जाने कितनी बांसुरी बेच पाती होगी या शायद कभी एक बांसुरी भी नहीं बेच पाती होगी  ना जाने कितने लोग होते होंगे उसके घर में ना जाने वह कैसे लोग का पेट भर पाती होगी  शायद वह अकेले ही रहती होगी  शायद उसका एक बेटा होगा या शायद उसकी एक बेटी होगी  जो राह तकते रहते होंगे कि मां आएगी कुछ पैसे कमा कर लाएगी और उसका पेट भर पाएगी  सुहागन तो कहीं से नहीं लगती पति नहीं होगा शायद या होगा भी तो शराबी होगा  या फिर बिगड़ा हुआ होगा नहीं करता होगा देखभाल अपनी पत्नी की अपने छोटे बच्चों की  ज्यादा उम्र तो नहीं लगती इसकी मुश्किल से 35 साल होगी या 30 साल  बच्चे अभी छोटे ही होंगे इसके ...

उड़ान

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 उठो जागो चलो और लग जाओ अपने काम पर कि यह  जिंदगी दोबारा नहीं मिलती है कि जिंदगी मिल भी जाए तो जवानी फिर नहीं मिलती है...  निर्भय होकर नम्रता के साथ अपने कर्म पथ पर लग जाओ देखना मंजिल बहुत करीब होगी, इतनी ऊंची उड़ान भरो कि लोग देखें तो देखते रह जाए पंछी तुम्हारा साथ पाना जाए...  हमारी खुशी दूसरों की खुशी में तो है पर अपने अंतर्मन को हमेशा पाक साफ रखो कि उसमें इतनी ऊर्जा भर जाए उसमें इतनी उष्मा भर जाए कि आपका मन कभी थके ही नहीं..चलता जाए, चलता जाए  हर काम हर बात को हर बाधा को दूर करते हुए आगे बढ़ता ही चला जाए..  अपना समय अपनी उर्जा को यू व्यर्थ जाया मत करो, बेकार की चीजों में मत लगाओ अपने समय को अपने काम को अपनी ख्वाहिशों को, अपनी उम्मीदों को,अपने ख्वाबों को पूरा करने में लगा दो....  पर करो पर चलो पर आगे बढ़ो पर उड़ान भरो  लेकिन अपने अनुभवों में कुछ अच्छे हो या बुरे कभी घबराओ मत उनका उनका सामना करो उनका डटकर सामना करो....  फिर देखना आपके किरदार से क्या महक आती है  अपने किरदार को इतना निखारो, इतना सवारो कि पूरी दुनिया ही महक जाए दुनिया में...

ख़ुशी के लिए

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 प्रेम को पाने के लिए प्रेम में डूबना पड़ता है यह आग का दरिया है जलकर भस्म होना पड़ता है यूँ ही मिल जाता किसी को प्रेम तो मीरा दीवानी नहीं होती जहर के प्याले को अमृत समझ नहीं पीती.... कृष्ण भी कहाँ द्रोपदी का चीर बढ़ाते न उसकी एक पुकार पर दौड़े चले आते.... जंगलो की खाक झानते फिरे राम वनवास में सीता के प्रेम मे स्वर्ण मृग का न शिकार करने जाते भूल कर सुध बुध प्रिय सीते सीते पुकारते रहे वे भगवान थे फिर भी  प्रेम को भगवान मानते रहे.... प्रेम कोई खेल नहीं कि इंसान इसे खेले  खुद की ख़ुशी के लिए  दूसरों को दुःख दे दे.... आचमन नहीं है प्रेम कि चखा और छिड़क दिया सिर माथे पर लगाकर पहले खुद की ख़ुशी भूले जीना पड़ता है उसके लिए सब कुछ भुला कर  प्रेम करने से पहले जरा सच्चे इंसान होले... सीमा असीम 12,1,21

अहसास

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 हम सोचते बहुत ज्यादा है पर महसूस नहीं करते  ना जाने क्या क्या सोचते रहते हैं दुनियादारी की बातें यहां वहां की बातें बेकार की बातें परेशान होने की बातें समझ ना आने वाली बातें बस हम सोचते ही रहते हैं पर कभी गहराई से महसूस नहीं करते  कभी एहसास में नहीं भरते सच में देखा जाए तो  एहसासों की दुनिया बहुत प्यारी है  बहुत खूबसूरत है  कभी एहसास करके तो देखो  जीवन को महसूस करके तो देखो सब समझ आ जाएगा क्योंकि  एहसासों की दुनिया सच्ची दुनिया होती है  मन की दुनिया होती है जहां होते हैं रंग बिरंगे  फूल खुश्बू  पक्षी तितलियां आसमान  और होता है क्षितिज जहां मिलते हैं धरती आकाश एकाकार होने के लिए.... सीमा असीम 9,1,21

ख़ुशी

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 अपनों को खुशी देने से जो खुशी आपके चेहरे पर आती है वह अनोखी होती है असीमित होती है उसका कोई ओर छोर ही नहीं होता...  पर हम ऐसा करते ही कहां है हम अपनी खुशी के पीछे भागते रहते हैं अपनी खुशी के लिए जाने कितने उतार-चढ़ाव चढते रहते हैं पर पाते क्या हैं कुछ नहीं कभी मुस्कुराया करो दूसरों को खुश देखकर कभी दूसरों को ख़ुशी बाँट आया करो जिंदगी है इसी का नाम  न रूठो किसी से पर जरूरत पड़े तो मनाया करो प्रेम की राह पर चलकर तो देखो अहसासों से भर जाओगे भूल जाओगे खुद ही को तुम ज़िन्दगी में महक से भर जाओगे... सीमा असीम 8,1,21

उम्मीद

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 जब हम किसी से उम्मीद रखते हैं  और ज़ब वे  पूरी नहीं होती तो  हम उदास हो जाते हैं निराश हो जाते हैं  हताश हो जाते हैं और दुख के सागर में डूब जाते हैं  पर हम ऐसा कभी सोचते ही नहीं कि अगर यह उम्मीद हमने अपने आप से रखी होती  फिर हम उसे पूरा कर रहे होते तो  हमें कितनी खुशी मिलती तब  ना हमारे मन में निराशा होती  न हताशा  होती  ना उदासी होती और ना ही हमारे पास होते दुःख परंतु हम ऐसा करते ही कहाँ है  हम तो सिर्फ दूसरों से ही अपेक्षाएं रखते है दूसरों की तरफ़ ताका करते हैं  कभी अपने मन की गहराई में उतर कर देखो कि  तुम क्या पाना चाहते हो किस बात से ख़ुशी मिलती है  और फिर उसे पाने के लिए शिद्दत से जुट जाओ  देखो कैसे पूरे नहीं होते तुम्हारे सारे ख्वाब  कैसे नहीं पूरी होती मन की सारी अपेक्षाएं लेकिन करो जो भी उसे सच्चे मन से करो फिर वह सब कुछ पा जाओगे जो  तुम पाना चाहते हो... सीमा असीम 7,1,21

पुकार

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 जब मेरा दिल पुकारता है तुम्हें शिद्दत से तो मेरी आवाज तुम तक पहुंच जाती है   फिर तुम भूल कर सारी दुनिया की बातें  खींचे चले आते हो मेरी तरफ  कुछ और याद नहीं रहता है तुम्हें  मेरे सिवाय  क्योंकि कहते हैं ना कि  दिल की आवाज दिल तक जाती है  कोई भी उसे फिर रोक नहीं सकता  यह मामला है दिल का  इसमें दुनिया क्या कर लेगी  कुछ भी नहीं कर पाएगी  फिर चाहे अंजाम कुछ भी हो  कोई भी फर्क नहीं पड़ता लेकिन पुकारना सदा अपने सच्चे मन से और सच्चे दिल की पुकार कभी जाया नहीं जाती   क्योंकि यह बात है दिलों की.. सीमा असीम 6,1,21

मुस्कान

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 हमारी छोटी सी मुस्कुराहट इतनी सारी परेशानियों को दूर कर देती है  फिर भी हम मुस्कुराना भूल जाते हैं  दुनिया की आपाधापी में  दुखी रहते हैं गम में  उदासी में उलझन में फंसे रहते हैं   मुस्कुराते कैसे हैं याद ही नहीं आता  लेकिन जब कभी कोई अपना  अचानक से आकर हाल पूछ लेता है  या प्यार के दो बोल कह देता है  अपने होने का एहसास करा देता है  दुनियादारी से दूर  मुस्कुराहट की दुनिया में धकेल देता है  हां सच में मुस्कुराना जीवन में एक औषधि की तरह काम करता है आपके सारे गमों को दूर कर देता है  सारे मर्जो की एक दवा है मुस्कान  और यह आती है अपनों के होने से अपनापन का एहसास दिलाने से....  सीमा असीम 5,1,21
 वो प्रेम की बात करता है कितना खाली है वो प्रेम से वो प्रेमिकाओं के नाम गिनाता है कितना दूर है वो प्रेमिकाओं से वो भागता है भटकता है सबके पीछे कितना तन्हा है वो उसे सच्चे साथी की तलाश है वो कितना झूठ है खुद करना चाहता है सब अपने नाम पर क्या कुछ नहीं है उसके पास क्यों करता है फिर वो बड़ी बड़ी बातें ज़ब इतना सा भी नहीं है उसके पास सुन खुदा के बंदे न बन तू इतना स्वार्थी...

प्रेम

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 अगर कोई तुमको अच्छा लगता है या किसी से तुमको प्रेम है तो थोड़ा रुको थोड़ा ठहरो लेकिन वक़्त गुजर जाए उससे पहले ही तुम उससे  कह दो क्योंकि वक्त तो गुजरता रहता है और जो साथी तुम्हें मिला है वह तुम्हें फिर मिले ना मिले क्योंकि इस दुनिया में  कोई किसी का इंतजार नहीं करता देखो न इस दुनिया में वक्त भी कहाँ करता है कभी किसी का इंतजार वक़्त अपने वक़्त पर गुजर जाता है बिना किसी की परवाह किये... सीमा असीम 4,1,21

हमारी सोच

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 हमारी सोच पर आधारित होती है हमारी दुनिया हम जैसे सोचते हैं दुनिया में वैसी ही नजर आती है इसलिए हम दुनिया को तो नहीं बदल सकते लेकिन अपनी सोच तो बदल सकते हैं  हम जैसा ही सोचना  शुरू करेंगे  वैसा ही हमें सब कुछ  नजर आने लगता है क्योंकि जैसी हमारी दृष्टि होती है वैसे ही हमारी सृष्टि बन जाती है.... सीमा असीम 4,1,21

रिश्ते

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 रिश्ते होते हैं निभाने के लिए और निभाने से ही रिश्ते बनते हैं अपनी खुशियां स्वार्थ के लिए बनाए गए रिश्ते कभी आपको भी खुशी नहीं देंगे ना आपको कभी सुख देंगे ऐसा ही मानना है,... लोग आजकल करते ही ऐसा है कि अपनी खुशी के लिए अपनी स्वार्थ पूर्ति के लिए रिश्ते को बनाते हैं और फिर उन्हें छोड़ देते हैं जब उनका स्वार्थ पूरा हो गया तो उनका रिश्ता खत्म ऐसे रिश्ते बहुत दुख देते हैं बहुत तकलीफ देते हैं खुद को भी और अपनों को भी जो आपके साथ जुड़े हुए होते हैं जो आपके अपने होते हैं....... सीमा असीम 2,1,20

रिश्ता

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 किसी भी रिश्ते को अगर ईमानदारी से निभाया जाए तो उस रिश्ते की गरिमा बहुत बढ़ जाती है उसके लिए दिल में बेपन्हा इज्जत होती है बेपनाह प्यार मोहब्बत लेकिन उस रिश्ते में जरा सी भी बेईमानी आ जाती है तो वह रिश्ता मन में घृणा  पैदा करता है मन में विश्वास खत्म करता है विश्वास को ठेस पहुंचाता हैं दिल को चोट लगती है और ब हुत दर्द होता है इसलिए कोई भी रिश्ता निभाओ तो पूरी ईमानदारी से निभाओ वरना उस रिश्ते का कोई मतलब ही नहीं है