बदली

भर आती है आँख 
और छलक जाती है 
गीतों की स्वर लहरी 
लबों पर खमोश हो जाती है 
तुम तो भटकते फिरे सनम 
यहाँ वहाँ 
न जाने कहाँ कहाँ 
मैं बन गयी एक बदली 
जो ठहर गयी एक ही जगह पर 
और बार बार बरस जाती है
सीमा असीम 
10, 6, 20

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