मरना नहीं है

जो जीना चाहते हैं उनको मरना पड़ता है 
हाँ आजकल तो मरकर  ही जीना पडता है ...
मैं तुमसे कहना चाहती हूँ कि यह जीवन नश्वर है और तुम मेरे लिए सत्य और इस सच को जीने के लिए अपने विश्वास को कायम रखने के लिए मुझे दिन रात तपना होता है किसी भी तरह से अपनी श्रद्धा को बचाए रखना होता है बस इसलिए ही मैं चाहती हूँ कि तुम मुझसे बन जाओ जैसी मैं हूँ वैसे तुम हो जाओ हाँ सागर बनी हूँ गर मैं तेरी चाह में तो तुम नदी सा बन जाओ .... मीठी नदी, कल कल बहती नदी, भरे हुए पानी से गहरी होती हुई नदी ,,,, तुम मुझसे हो जाओ एकदम सच्चे सदा सच्चे .....
सीमा असीम 
3,6,20 

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