मेरी नाराजगी
मैं जब कभी नाराज होना चाहती हूँ
नहीं हो पाती हूँ कि नहीं है
मेरी प्रकृति कभी किसी से नाराज होने की
लेकिन मेरे भोलेपन या कहिए सीधेपन का बदला ले लेती है
प्रकृति
चुन चुन कर एक एक बात का
मेरे दर्द का
मेरे दुख का
मेरे कष्ट का
मेरी तड़प का
मेरी अवहेलना का
मेरी मासूमियत का फायदा उठाने वाले का
वो अपने क्रोध से
हर उस शख्स को
रुला देती है
जिसने मेरे आंसुओं को बहने दिया
कभी मुझे संभाला नहीं
कभी सहारा नहीं दिया
मेरे टूटने पर और तोड़ा
मेरे रोने पर और हंसा
छीन कर मुस्कान मेरी
मेरा उदासियों से नाता जोड़ा
उसे कभी भी प्रकृति ने चैन से
सोने न दिया
गिन गिन के हमेशा बदला लिया और
लेता रहेगा
मैं नहीं जानती किसी को दुख देना
मैं सदा सुख देना चाहती हूँ
खुशी और मुस्कान भी
नहीं करती मैं परवाह किसी के लिए
क्या दिया उसने मुझे
हाँ मैं कह नहीं पाती हूँ लेकिन
रो लेती हूँ
जी भर के रोती हूँ
मुझे रोना अच्छा नहीं लगता है
मुझे पसंद है हँसना मुसकुराना
कलियों की तरह खिल जाना
जीवन को मस्त होकर
मस्ती में बिताना !
सीमा असीम
5,6,20
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