जितना भी दूर जाने की कोशिश करूँ और करीब आते हो
जब देते हो इतना दर्द तो फिर क्यों याद आते हो सनम 
सुनो प्रिय 
                कितना मुश्किल वक्त है और आंसुओं का सैलाब आँखों में  जानती हूँ मैं सनम क्यों इतना दर्द मुझे हो रहा है ,क्यों मेरी आत्मा कोई खींचे लिए जा  उठते चैन न बैठते चैन ,बोलो ऐसा क्या  तुमने ,क्यों सत्ता रहे हो मुझे ,जब तुम्हारे पास मेरे लिए समय ही नहीं है और न ही मेरी तकलीफ से तुम्हें कोई वास्ता है फिर क्यों नहीं चले जाते मेरे पास से ,मैं जी लुंगी रो रो कर  कर या मर मर कर लेकिन तुम जैसे शख्स के साथ कैसे रिश्ता निभाऊं जिसे मेरी नाम मात्र की भी परवाह या फ़िक्र नहीं है , जो सिर्फ अपनी मस्ती का मारा हुआ है उसे किसी के दर्द से भला क्या लेना देना हो सकता है , मुझे रात  भर नींद नहीं आयी, मुझे  नहीं पता था कि तुम इतने गैर जिम्मेदार हो , कि कोई तड़प तड़प कर मर जाए और तुम चैन की बंशी बजाते रहो ,,आह मेरा दिल  कितनी तकलीफ से भरा हुआ है , पल पल तुम्हारी तस्वीर मेरी आँखों के सामने है ,और वे गुजरे हुए पल जो तुमने मेरे साथ गुजारे थे , क्या तुम्हें उन लम्हों की जरा भी याद नहीं आती , क्या उन लम्हों को याद करके तुम्हारा दिल नहीं भर आता है , तुम एक निराई इंसान हो , जिसे किसी की फ़िक्र नहीं , अब क्या कहूं मैं , तुमने तो मुझे मार ही दिया , मुझसे वादा करते हो साथ ले जाने का लेकिन किसी और को साथ लेकर चले जाते हो आखिर तुम किस तरह से ऐसा कर लेते हो , आखिर तुम किसी दूसरे का हाथ पकड़ कर चल लेते हो , कैसे तुम उसे चुम लेते हो और कर लेते हो वही सब कुछ जो तुम मेरे साथ करते हो ,बोलो बताओ मुझे , मैं जानना चाहती हूँ तेरी फितरत , कैसे देगा दे देते हो मुझे और कैसे खुद को समझा लेते हो मेरे दिल से दर्द भरी आह निकलती है आह ,,,,,,,ये मेरा दिल जिसे तुमने निचोड़ कर रख दिया , मैं अपने खून से तुम्हें एक एक अक्षर लिखती हूँ , मैं अपने दर्द नहीं दिल का कतरा कतरा लिखती हूँ , हे बेदर्दी  तुझे भी जब यह गम सताएगा , जब तुझे भी मेरा दर्द जीने नहीं देगा तब तू भी कलेजा थाम कर बैठ जाएगा। ...हे ईश्वर वो दिन जल्दी से आये। ..जब मेरे दर्द को राहत मिले ,,, जब मेरे कलेजे में लगी आग को ठंडक पड़े ,,,,,जब मेरी जलती हुई काया को राहत की साँस आये। ..... 
जल रही हूँ सनम मैं जिस आग में 
एक दिन तुझे भी यही आग जला कर भस्म करेगी। ... 
देखना सनम देर है रब के दरबार में लेकिन अंधेर नहीं है ,,बिलकुल भी नहीं है सनम ,,,,,,अरे औ दर्द के सौदागर प्रेम के नाम पर गर्म जिस्म ही तेरी पाना तेरी फितरत है ,,,तुझे कभी सकूँ न आये ,,,,कभी न आये ,,,,
सीमा असीम 
७,६,१९ 

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