हम अपनों से अपनी सच्चाई छुपा कर जीते हैं
इस झूठ से हम अपनों को ही दुःख देते हैं  ...... 
सुनों प्रिय 
               हम नहीं जानते हैं कि जो बातें हमने अपनों से छुपा कर राखी और वही बातें हमें गैरों के मुंह से सुनने को मिली तो सोचो कितना दुःख होता होगा ,कितनी आत्मा तड़पती होगी ,कितना दर्द होता होगा और आँखों के आंसू कभी सूखते ही नहीं होंगे हैं न ,सच में अब मेरा दिल चाहता है कि जो दर्द जो तकलीफ तुमने मुझे दी है उसका तुम्हें अहसास तो एक बार हो एक तो तुम उस दर्द से गुजरो एक बार तो तुम भी मेरी तरह से छटपटा  जाओ ,प्रिय यह प्रेम का दर्द है इसमें इंसान को कभी भी मुक्ति नहीं मिलती है अगर उसका प्रेमी जिसे वो अपने सच्चे मन से चाहती हो उसने धोखा दिया हो ,मैं सोचती हूँ कि तुम मेरे साथ ऐसा कैसे कर पाए ,कैसे तुम किसी और को गले लगा पाए ,किस तरह से किसी और का हाथ पकड़ कर चल पाए और किस तरह से वही प्रेम और मोहब्बत की बातें कर पाए ,बोलो न एक बार तो बता दो मुझे ,लेकिन नहीं तुम मुझे कैसे बताओगे क्योंकि तुमने मुझे हमेशा धोखे में रखा और मेरे साथ खेल खेलते रहे , दुःख देते रहे ,खैर अब क्या करना तुमने जो करना था वो तो तुमने कर ही लिया न ,मेरे दिल को तार तार करके अपनी ख्वाहिशें पूरी तो कर ही ली न ,मुझे दुःख के सागर में धकेल कर खुद सुख की छांव तलाश ली न ,एक गहरी स्वांस और आँसूओं का बह जाना , दर्द की लकीर एक और दिल में खिंच जाना , कैसे समझ पाओगे तुम भला मेरे दर्द को ,जबकि गुनहगार तो तुम ही हो ,,,,
दिल से आवाज लगती हूँ और रो पड़ती हूँ 
आय सनम तुम इतने दगावाज निकले ,,,,
सीमा असीम 
२,६,१९  

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