नहीं थमें अश्क यूँ ही बहते रहे
ओ मेरे चाँद तेरे लिए जान दी है
सुनो प्रिय
जब मैं तुम्हें प्रेम करती हूँ तो तुम भी तो मुझे उतना ही प्रेम करते होंगे हैं न क्योंकि मुझे इतना पता है कि अगर कोई किसी को जरा भी प्रेम करता है तो उसे उससे दुगुना प्रेम मिलता है आज जब दिल की उदासी में थोड़ा सा सुधार हुआ तो मेरा दिल संभल गया और तुमसे बात करने का मन बनाया लेकिन सनम तुम अपने मन में कितने भाव रखते हो, क्या तुम एक प्यारे इंसान नहीं बन सकते, बताओ मुझे, बोलो मुझसे, मैं जोर जोर से चीखना चाहती हूँ , मैं बहुत जोर से तुम्हें आवाज लगाना चाहती हूँ, मैं नहीं चाहती कि मेरी आवाज गले में घुट कर रह जाए और मैं तड़प तड़प कर मर जाऊं, सनम मैं तुम्हारे लिए मरने को भी तैयार हूँ लेकिन तुम मेरे प्रेम में कहीं और ज्यादा उदास न हो जाओ कहीं दर्द के गुबार में न खो जाओ, बस यह सोच कर दिल घबराता है और मैं तमाम दर्द अकेले ही पी लेती हूँ फिर कभी तुम्हें कोई दर्द न देने की सोच कर मर मर कर भी मैं जी लेती हूँ ! सनम तुम ख़ुश होते हो तो मेरा मन भी ख़ुशी से भर जाता है लेकिन तब बहुत बुरा लगता है जब तुम किसी और के कारण मुझे दुःख देते हो और मेरी आँखों में आंसू भर देते हो ,,,,,फिर भी मैं कभी नहीं चाहती कि तुम्हें कोई दुःख पहुंचे लेकिन मेरी आत्मा से दर्द भरी कराहट निकलती है और मैं खुद में नहीं रहती मैं बेहोश हो जाती हूँ मैं भंवर में फंस जाती हूँ और मेरा दम घुटने लगता है ...
यह मेरा प्रेम और यह मेरी बेचैनियां
मुझे जीने नहीं देती मुझे मरने नहीं देती
आँखों की कोरों से बहते हुए आंसू
मेरी आँखों की नमी काम होने नहीं देती !!
सीमा असीम
४,६,१९
Comments
Post a Comment