मैं लिख देती हूँ अपनी ही तकदीर अपने ही हाथों से अय सनम तुझे मैं रज रज के रचती हूँ हीरे की तरह सुनो सनम आज बड़े दिनों के बाद तुम्हें लिखने बैठी हूँ तो जी चाहता है कि वो एक एक बात लिख दूँ जो तुम्हारे मन को ख़ुशी दे , सकूँ दे , करार दे और मन को फूलों की तरह हल्का फुल्का और सहज कर दे। .... लेकिन मैं अपने दुखी दिल से तुम्हें ऐसा कैसे दे सकती हूँ कि रात रात भर जाग जाग कर तड़पती हूँ ,इतने अश्क आँखों से बहाती हूँ कि नदियां समुन्दर सब भर जाए और इतनी जोर जोर से तुम्हें अपनी अंतरात्मा से पुकारती हूँ कि क्षीर सागर में विश्राम करते विष्णु भगवन चौंक कर जग जाए और मां लक्ष्मी घबरा उठे सनम यह सच्चे प्रेम की पुकार है , तड़प और बेचैनी है जो तुम शायद समझ सको सनम तेरे सिवाय और कोई भी मेरा नहीं सिर्फ तुम और सिर्फ तुम ही मेरे सबकुछ हो , जान सको तो जान लेना , वैसे सच तो यही है कि तुम मेरे मन की एक एक बात समझ जाते हो जो मैं तुमसे कहती भी नहीं हूँ और चाह कर भी कह नहीं पाती हूँ क्योंकि मुझे तुम्हार...
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Showing posts from June, 2019
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दिल भर भर आता है औ आंसू छलक छलक जाते हैं तेरी याद में सनम तेरे दर्द में सनम जी नहीं पाते हैं सुनो प्रिय तुम किस तरह से मेरे बिना जी लेते हो मेरी याद है कैसे तुम्हारा दिल नहीं धड़कता है कैसे तुम तक मेरी आवाज नहीं जाती है ,,,बोलो न सनम बताओ न मुझे सनम , वो कौन सी तरकीब है , वो कौन सी विद्द्या है जिसे तुमने अपने जीवन में उतार लिया और सुख से जी लेते हो या शायद तुम भी मेरी ही तरह से परेशान रहते हो ,मेरी ही तरह से दुखी होते हो ही तरह से आंसू बहाते हो , मुझे लगता है जैसी मेरी हालत होती है तुमसे दूर रहकर वैसी ही तुम्हारी भी होती होगी क्योंकि दिल से दिल को राह होती है और जैसा हम सोचते हैं वैसा ही सामने वाला सोचता है लेकिन सनम चाहे जो भी हो सही या गलत झूठ या सच मुझे कुछ नहीं पता न दुनियादारी का पता है मालूम है तो सिर्फ इतना कि मैं तुम्हारे प्रेम में हहूँ सिर्फ तुम्हारी और तुम्हारे प्रेम में भले ही दुनियां की कितनी भी मुश्किलें हमारे रास्ते में आये मैं कभी भी पीछे नहीं हटूंगी और न ही कभी डरूंगी सिर्फ तुम्हारी होकर मैं सिर्फ तुम...
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तुम्हें चाहूँ तुम्हें पूजूँ और तुम्हें ही प्यार करूँ अय सनम तेरे लिए तो जां भी निसार करूँ !! सुनो प्रिय , आज का दिन अच्छा बीत गया, बस नींद आयी तो तुम्हारा ख्याल आया और ना जाने क्यों दिल घबराने लगा फिर नींद नहीं आयी , सनम यह मेरा प्रेम ही तो है जो मुझे एक पाँव से नाचने को मजबूर कर देता है घुमाता रहता है चकरघिन्नी की तरह ,!! जैसे घूमती रहती है पृथ्वी गोल गोल, ऐसे ही मेरा मन भी तुम्हारे चारो और परिक्रमा करता रहता है और मन ही मन तुम्हारा नाम जपता रहता है जैसे कोई मंत्रोचार हो रहा हो ,! सोचने लगती हूँ कि तुम्हें न जाने कब मिल पाऊँगी, न जाने कब तुमसे दिल की बात कह पाऊँगी,! नहीं जानती मैं बस इतना पता है कि तुम्हें मैं अपने मन से पल भर को भी दूर नहीं कर सकती हूँ और जब जरा किसी अन्य काम में व्यस्त हो जाती हूँ तभी अचानक से दिल घबरा जाता है और मैं बेक़रार हो जाती हूँ ! न जाने यह प्रेम का कौन सा रूप है, या कौन सी चाह है यह सब जानने में असफल हूँ मैं ,सच में असफल !...
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सोचती हूँ तुम्हें बस सोचती रह जाती हूँ कि प्रेम करती हूँ मैं तुम्हें जान से जयादा ! सुनो प्रिय यह सच है कि तुम सिर्फ मेरे हो लेकिन सनम यह मेरे दिल को क्या हो जाता है क्यों मन में गलतफहमियां पल जाती है फिर चाहें तुम मुझे लाख समझा दो या मैं खुद ही अपने मन को समझा दूँ दिल समझता ही नहीं है ,,,आज जब तुमसे बात की तो लगा कि हमारे मन में तो तुम्हारे लिए सिर्फ प्रेम है और कुछ भी नहीं मैं सिर्फ तुम्हारी हूँ प्रिय जैसी भी हूँ या जो कुछ भी हूँ सिर्फ तुम्हारी , हाँ इतना कि मैं एकदम से सच्चे मन से ही हमारा निभाऊंगी , हर कष्ट को अकेले सह कर भी अब तुमसे कोई शिकवा या शिकायत करुँगी क्योंकि हूँ कि तुम मेरे हो सिर्फ मेरे और रहोगे भी, पता है प्रिय ऐसा लगता है मुझे कि मेरी आँखों में कोई नदी बस गयी है जो जब देखो तब बह जाने को आतुर जाती है जो मेरे लाख कोशिश करने पर भी रूकती या थमती नहीं है। ...न जाने कहा...
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तुमसे प्रेम किया है और सदा करते ही रहेंगे तुम इसे नफ़रत का रंग मत देना कभी सुनो मेरे प्रिय क्या तुम्हें पता है कि मेरे दिल में कितना प्रेम है सिर्फ तुम्हारे लिए सनम मुझे भटकने से बचा लो मैं बर्बाद हो जाउंगी , कितना दिल में दर्द उठता है सारा चैन और सकूँ खो जाता है ,हाँ किसी मशीन की तरह से जी तो लेते हैं लेकिन यह जीना भी कोईअहन जीना है जहाँ तुम न हो वहां पर जीवन कैसे हो सकता है क्योंकि मैं तो तुम्हारी सांसों से ही साँस लेती हूँ ,जब कभी मेरी साँस घुटने लगती है तब मुझे लगता है कि जरूर तुम भी वहां तकलीफ में हो , मेरी बेचैनी उस वक्त चरम पर होती है अब तुम ही बताओ यह मेरा जीवन मेरा कैसे हुआ , तुम्हारा ही है न। सनम कई रातों के रतजगे के बाद आखिर जब तुमसे बात हो गयी तो दिल को थोड़ा कसकुन आया और मैं चैन की नींद सो ली वरना नींद तो थोड़ी बहुत आती थी पर चैन या सकूँ नहीं आता था ,,,,,, खैर प्रिय तुम अपना ख्याल मेरे लिए रखा करो क्योंकि तुम जब अपना ख्याल रखते हो तो मैं सही रहती हूँ ,,,प्रिय दुनिया में बहुत दुःख है , बहुत कष्ट हैं ...
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जितना भी दूर जाने की कोशिश करूँ और करीब आते हो जब देते हो इतना दर्द तो फिर क्यों याद आते हो सनम सुनो प्रिय कितना मुश्किल वक्त है और आंसुओं का सैलाब आँखों में जानती हूँ मैं सनम क्यों इतना दर्द मुझे हो रहा है ,क्यों मेरी आत्मा कोई खींचे लिए जा उठते चैन न बैठते चैन ,बोलो ऐसा क्या तुमने ,क्यों सत्ता रहे हो मुझे ,जब तुम्हारे पास मेरे लिए समय ही नहीं है और न ही मेरी तकलीफ से तुम्हें कोई वास्ता है फिर क्यों नहीं चले जाते मेरे पास से ,मैं जी लुंगी रो रो कर कर या मर मर कर लेकिन तुम जैसे शख्स के साथ कैसे रिश्ता निभाऊं जिसे मेरी नाम मात्र की भी परवाह या फ़िक्र नहीं है , जो सिर्फ अपनी मस्ती का मारा हुआ है उसे किसी के दर्द से भला क्या लेना देना हो सकता है , मुझे रात भर नींद नहीं आयी, मुझे नहीं पता था कि तुम इतने गैर जिम्मेदार हो , कि कोई तड़प तड़प कर मर जाए और तुम चैन की बंशी बजाते रहो ,,आह मेरा दिल कितनी तकलीफ से भरा हुआ है , पल पल तुम्हारी तस्वीर मेरी आँखों के सामने है ,और वे गुजरे हुए...
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नहीं थमें अश्क यूँ ही बहते रहे ओ मेरे चाँद तेरे लिए जान दी है सुनो प्रिय जब मैं तुम्हें प्रेम करती हूँ तो तुम भी तो मुझे उतना ही प्रेम करते होंगे हैं न क्योंकि मुझे इतना पता है कि अगर कोई किसी को जरा भी प्रेम करता है तो उसे उससे दुगुना प्रेम मिलता है आज जब दिल की उदासी में थोड़ा सा सुधार हुआ तो मेरा दिल संभल गया और तुमसे बात करने का मन बनाया लेकिन सनम तुम अपने मन में कितने भाव रखते हो, क्या तुम एक प्यारे इंसान नहीं बन सकते, बताओ मुझे, बोलो मुझसे, मैं जोर जोर से चीखना चाहती हूँ , मैं बहुत जोर से तुम्हें आवाज लगाना चाहती हूँ, मैं नहीं चाहती कि मेरी आवाज गले में घुट कर रह जाए और मैं तड़प तड़प कर मर जाऊं, सनम मैं तुम्हारे लिए मरने को भी तैयार हूँ लेकिन तुम मेरे प्रेम में कहीं और ज्यादा उदास न हो जाओ कहीं दर्द के गुबार में न खो जाओ, बस यह सोच कर दिल घबराता है और मैं तमाम दर्द अकेले ही पी लेती हूँ फिर कभी तुम्हें कोई दर्द न देने की सोच कर मर मर कर भी मैं जी लेती हूँ ! सनम तुम ख़ुश होते हो तो मेरा मन भी ख़ुशी से ...
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आज वट सावित्री की पूजा है मुझे खूब अच्छी तरह से याद है कि तुम्हारे लिए मैंने व्रत रखा था पूजा की थी और तुम्हारे टीका लगाकर तुम्हारे पैर छूकर तुम्हारा आशीर्वाद लिया था कहाँ पता था मुझे जिस पर अपना तन मन धन सब हार बैठी हूँ वही शख्श मुझे बर्बाद कर देगा सिर्फ अपनी ख़ुशी की खातिर ,,ओह्ह्ह यह दर्द और यह कष्ट तुम किस तरह से मुझे दे पाए ,,,तुम्हारी नजरों के सामने मेरा चेहरा नहीं आया ,,,मुझे पता है इस दुनिया में न तो ईश्वर है न उसकी कोई शक्ति अगर होती तो तुम अपना धर्म निभाते अपने फर्ज के लिए कुर्बान हो जाते ,,वो प्यारा दिन था सुबह से ही मेरे मन में बेहद श्रद्धा थी मैं आज तुम्हारे लिए व्रत रखने वाली थी बिना पानी पिए ही रखना था ,मेरे मन में कितनी आस्था और प्रेम था जो मैं सब तुम्हारे लिए न्योछाबर का देना चाहती थी उसके लिए जो मुझे पल पल छल रहा था, जो झूठ और दिखावे की शक्ल का लावड़ा ओढ़े हुए वो इंसान अपनी फितरत छुपाये हुए था एक खोल में ,,,हालाँकि मेरे पास पूजन की इतनी चीजें नहीं थी फिर भी मन में पूरा समर्पण भाव था ,,,,मैंने पूजा कर के जब तुम्हें प्रसाद खिलाया तब मुझे लगा कि दुनिया में सचमुच ईश्वर...
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हम अपनों से अपनी सच्चाई छुपा कर जीते हैं इस झूठ से हम अपनों को ही दुःख देते हैं ...... सुनों प्रिय हम नहीं जानते हैं कि जो बातें हमने अपनों से छुपा कर राखी और वही बातें हमें गैरों के मुंह से सुनने को मिली तो सोचो कितना दुःख होता होगा ,कितनी आत्मा तड़पती होगी ,कितना दर्द होता होगा और आँखों के आंसू कभी सूखते ही नहीं होंगे हैं न ,सच में अब मेरा दिल चाहता है कि जो दर्द जो तकलीफ तुमने मुझे दी है उसका तुम्हें अहसास तो एक बार हो एक तो तुम उस दर्द से गुजरो एक बार तो तुम भी मेरी तरह से छटपटा जाओ ,प्रिय यह प्रेम का दर्द है इसमें इंसान को कभी भी मुक्ति नहीं मिलती है अगर उसका प्रेमी जिसे वो अपने सच्चे मन से चाहती हो उसने धोखा दिया हो ,मैं सोचती हूँ कि तुम मेरे साथ ऐसा कैसे कर पाए ,कैसे तुम किसी और को गले लगा पाए ,किस तरह से किसी और का हाथ पकड़ कर चल पाए और किस तरह से वही प्रेम और मोहब्बत की बातें कर पाए ,बोलो न एक बार तो बता दो मुझे ,लेकिन नहीं तुम मुझे कैसे बताओगे क्योंकि तुमने मुझे हमेशा धोखे में रखा और मेरे साथ ख...
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यही सच है कि एक दिन हर तरफ फूल ही फूल खिल जाएंगे आँखों से बहाये हैं सनम अश्क मैंने इतने ज्यादा , सुनो प्रिय आँखों ने बहने वाले आंसुओं का कभी तो सिला मिलेगा जरूर कि दिल इतना भारी और दर्द से भर दिया है तुमने मेरा मैं तुम्हें चीख कर अपनी आत्मा से आवाज लगाती हूँ लेकिन यह आवाज कहीं बीच में ही घुटकर दम तोड़ देती है और तुम्हारे पास तक नहीं जाती जितनी जोर से भी आवाज लगाऊं दिल का लहुं आखों से बहा दूँ कोई भी सदा तुम तक जाती नहीं है तभी तो तुम कभी मुझे याद नहीं करते ,,सनम तुम भी मेरे जैसे ही मुझे चाहते ,मेरे जैसे ही मुझे प्रेम करते मेरे जैसे ही मेरा इन्तजार करते तो शायद तुम्हें मेरा ख्याल आता , तुम्हारे दिल में एक बार मेरे लिए दर्द होता ,तुम भी यूँ ही तड़प तड़प कर मचल मचल जाते ,जमीं पर लोट लगते या शावर के नीचे घंटो खड़े हो जाते फिर भी दिल की अगन काम नहीं होती किसी भी तरह तुम्हें सकूँ या करार न आता , बेजान जिस्म काम करता रहता और आत्मा दर्द के सागर में डूब जाती तब तुम्हे पता चलता कि प्रेम क्या होता है या उसका दर्द क्या हो...