चलो सनम किसी ऐसे जहाँ में
जहाँ हो सिर्फ तेरी बाहों के साये। ..
सुनो प्रिय
आज रात भर तेरा ही ख्याल मन पर हॉबी रहा कुछ समझ ही नहीं आ रहा था कि कैसे हम कभी मिलेंगे ? कैसे हम कभी एक दूसरे को रूबरू देखेंगे ? कैसे हम संग संग कुछ कदम चलेंगे ? सच में बड़ा मुश्किल है बेहद मुश्किल ,,,जिसका नाम हरवक्त लबों पर है और जो सीने में धड़कन बनकर धड़कता है उससे कभी रूबरू मिलने को मिलेगा ? क्या उसे अपने तड़पते हुए दिल से लगाने को मिलेगा ? पता नहीं शायद रब की मर्जी के आगे सब कुछ नामुमकिन है अगर रब चाहें तो हमें पल भर में मिला दे या उसकी मर्जी नहीं है तो सदियों उसके इन्तजार में यूँ ही गुजर जाएँ ,,,,सनम मेरे माहि कि तेरी चाहत में खोकर मैंने सब भुलाया है तो ो मेरे खुदाया उसे मुझसे एक बार तो मिला जिससे मेरे मन को सकूँ आ जाए और खोया करार लौट आये मैं तुमसे सब गीले शिकवे शिकायते कहकर खुद को हल्का कर लू ,कह दू या वो सब जो कुछ भी हमारे दिल में है ,,,,सनम तेरे लिए ही अब जीने की चाहत है और अब यह चाहत ही मेरे का दर्द बन गयी है न कहने का मन होता है कभी कुछ किसी से न सुनना चाहती हूँ कुछ भी किसी को किस तरह से मिले रहत अब यह भी तो मैं सोचती नहीं ,क्या करूँ सोचकर अब मैं कुछ भी कि तेरे सिवाय अब मेरी कोई न चाहत है न कोई ख्वाहिश ,,बस तुम हो और सिर्फ तुम ,,,,आज मन के जज्वात उमड़ आये सभी आज दर्द थम जाए सभी जो कर लो ठहर कर पल भर भी तुम मुझसे अपने दिल की बात। ...
बहुत खुशियां हैं और दर्द भी बहुत है
गर हो संग तुम तो और कोई चाहत ही नहीं है ,,,,,
सीमा असीम
३१,५ ,१९
जहाँ हो सिर्फ तेरी बाहों के साये। ..
सुनो प्रिय
आज रात भर तेरा ही ख्याल मन पर हॉबी रहा कुछ समझ ही नहीं आ रहा था कि कैसे हम कभी मिलेंगे ? कैसे हम कभी एक दूसरे को रूबरू देखेंगे ? कैसे हम संग संग कुछ कदम चलेंगे ? सच में बड़ा मुश्किल है बेहद मुश्किल ,,,जिसका नाम हरवक्त लबों पर है और जो सीने में धड़कन बनकर धड़कता है उससे कभी रूबरू मिलने को मिलेगा ? क्या उसे अपने तड़पते हुए दिल से लगाने को मिलेगा ? पता नहीं शायद रब की मर्जी के आगे सब कुछ नामुमकिन है अगर रब चाहें तो हमें पल भर में मिला दे या उसकी मर्जी नहीं है तो सदियों उसके इन्तजार में यूँ ही गुजर जाएँ ,,,,सनम मेरे माहि कि तेरी चाहत में खोकर मैंने सब भुलाया है तो ो मेरे खुदाया उसे मुझसे एक बार तो मिला जिससे मेरे मन को सकूँ आ जाए और खोया करार लौट आये मैं तुमसे सब गीले शिकवे शिकायते कहकर खुद को हल्का कर लू ,कह दू या वो सब जो कुछ भी हमारे दिल में है ,,,,सनम तेरे लिए ही अब जीने की चाहत है और अब यह चाहत ही मेरे का दर्द बन गयी है न कहने का मन होता है कभी कुछ किसी से न सुनना चाहती हूँ कुछ भी किसी को किस तरह से मिले रहत अब यह भी तो मैं सोचती नहीं ,क्या करूँ सोचकर अब मैं कुछ भी कि तेरे सिवाय अब मेरी कोई न चाहत है न कोई ख्वाहिश ,,बस तुम हो और सिर्फ तुम ,,,,आज मन के जज्वात उमड़ आये सभी आज दर्द थम जाए सभी जो कर लो ठहर कर पल भर भी तुम मुझसे अपने दिल की बात। ...
बहुत खुशियां हैं और दर्द भी बहुत है
गर हो संग तुम तो और कोई चाहत ही नहीं है ,,,,,
सीमा असीम
३१,५ ,१९

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