ख़ुशी में बज उठे दिल के तार
कहनी थी जो दिल की बात
वे सब उनसे कहने लगी। ......
चमक हुई आँखों में ह्रदय में मोर नाच उठा कि सनम तुमसे सब बातें दिल की अब कहने जो लगी हूँ ,मन कितना हल्का फुल्का सा हो गया है, मानों हवा में उड़ता हुआ सा, अब दिल में कोई भेद ही नहीं मैं अब जैसी भी हूँ बस ऐसी ही हूँ कभी कोई दुराव नहीं कोई छल नहीं, निरमल जल सा बहता हुआ साफ ह्रदय जिसमें बस हो तुम, अपना डेरा बनाकर, उसमें तुम निरंकुश तैरते रहो सुख सागर में जैसे विष्णु भगवन बिराजते हैं ठीक वैसे ही तुम आराम की मुद्रा में रहो और मुझे यूँ अपने चरणों की तरफ बैठा रहने दो, तुम करो जग की हर रीत पूरी मुझे बस तुमसे प्रीत करने दो , सच में आज कितने दिनों के बाद मन को सकूँ सा आया था, बह रही थी दर्द से जो आँखें अब ख़ुशी से बह रही थी, मैंने अपने दिल की बातें तुम्हारे दिल से कह दी और हर चिंता से मानों दूर हो गयी अब हर तरफ तुम हो सिर्फ तुम ,,,जैसे हर अक्स में तुम बस गए हो, हर कण में तुम चमक उठे हो, जैसे नभ में चमकते हुए सूर्य तारे चाँद और सरे गृह सिर्फ तुम बन गए हो, अब तुम रहो कहीं भी हो सिर्फ मेरे और मेरे पास।
उत्साह आनंद ख़ुशी सब मेरे ह्रदय में है क्योंकि तुम हो जहाँ मेरी खुशियां वही पर। ...... आज जब तुम अनायास मुझसे बात करने को उतावले से हुए लेकिन तुम्हारे मन का डर तुम्हें खामोश कर देता है न जाने क्यों डरते हो, मुझे कुछ नहीं चाहिए तुमसे, कुछ भी तो नहीं जैसे तुम मेरे हो न वैसे ही मैं तुम्हारी हूँ मिले न मिले उस से क्या होना है हम साथ ही सतत हैं हमेशा और रहेंगे ही क्योंकि हम जिस्म नहीं आत्मा हैं सिर्फ रूह जो आपस में जुड़ गयी है ,,,,,,,,,,,
क्या करेगा जमाना जब साथ मेरे
मेरा खुदा। .....होती है कबुल हर दुआ
जब सच्चे मन करे कोई।
सीमा असीम
कहनी थी जो दिल की बात
वे सब उनसे कहने लगी। ......
चमक हुई आँखों में ह्रदय में मोर नाच उठा कि सनम तुमसे सब बातें दिल की अब कहने जो लगी हूँ ,मन कितना हल्का फुल्का सा हो गया है, मानों हवा में उड़ता हुआ सा, अब दिल में कोई भेद ही नहीं मैं अब जैसी भी हूँ बस ऐसी ही हूँ कभी कोई दुराव नहीं कोई छल नहीं, निरमल जल सा बहता हुआ साफ ह्रदय जिसमें बस हो तुम, अपना डेरा बनाकर, उसमें तुम निरंकुश तैरते रहो सुख सागर में जैसे विष्णु भगवन बिराजते हैं ठीक वैसे ही तुम आराम की मुद्रा में रहो और मुझे यूँ अपने चरणों की तरफ बैठा रहने दो, तुम करो जग की हर रीत पूरी मुझे बस तुमसे प्रीत करने दो , सच में आज कितने दिनों के बाद मन को सकूँ सा आया था, बह रही थी दर्द से जो आँखें अब ख़ुशी से बह रही थी, मैंने अपने दिल की बातें तुम्हारे दिल से कह दी और हर चिंता से मानों दूर हो गयी अब हर तरफ तुम हो सिर्फ तुम ,,,जैसे हर अक्स में तुम बस गए हो, हर कण में तुम चमक उठे हो, जैसे नभ में चमकते हुए सूर्य तारे चाँद और सरे गृह सिर्फ तुम बन गए हो, अब तुम रहो कहीं भी हो सिर्फ मेरे और मेरे पास।
उत्साह आनंद ख़ुशी सब मेरे ह्रदय में है क्योंकि तुम हो जहाँ मेरी खुशियां वही पर। ...... आज जब तुम अनायास मुझसे बात करने को उतावले से हुए लेकिन तुम्हारे मन का डर तुम्हें खामोश कर देता है न जाने क्यों डरते हो, मुझे कुछ नहीं चाहिए तुमसे, कुछ भी तो नहीं जैसे तुम मेरे हो न वैसे ही मैं तुम्हारी हूँ मिले न मिले उस से क्या होना है हम साथ ही सतत हैं हमेशा और रहेंगे ही क्योंकि हम जिस्म नहीं आत्मा हैं सिर्फ रूह जो आपस में जुड़ गयी है ,,,,,,,,,,,
क्या करेगा जमाना जब साथ मेरे
मेरा खुदा। .....होती है कबुल हर दुआ
जब सच्चे मन करे कोई।
सीमा असीम

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