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 जीवन क्या है  जब हम दुनिया में आते हैं लोग कितने खुश होते हैं मां बाप भाई बहन इतने सारे रिश्ते नाते बनते चले जाते हैं हम अपनी आंखें खोलते हैं दुनिया को देखते हैं दुनिया बहुत प्यारी लगती है एकदम नया नया सब कुछ जीवन को जीने की इच्छा मन में शक्ति है उछलते कूदते बड़े होते चले जाते हैं पढ़ लिखकर बुद्धिमान बनते जाते हैं यार जैसे जैसे दुनिया को देखते जाते हैं वैसे-वैसे बनने की कोशिश करते हैं हमारे मन में छल कपट प्रपंच जाने क्या-क्या झूठ सब शामिल होता चला जाता है हमारे निश्चल तरह एक होती चली जाती है फिर धीरे-धीरे करके हम अपने गृहस्ती परिवार में मगन हो जाते हैं अपने मां-बाप जिनको हम जिन्होंने में पैदा किया वह हम उनको ना हम देखते हैं ना सुनते हैं बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो अपने मां-बाप का भी सहारा बनते हैं फिर वह अपनी गृहस्थी में मगन होते हैं अपने बच्चों के साथ में खुश रहते हैं बच्चे बड़े हो जाते हैं अपने पांव पर खड़े हो जाते हैं और फिर 1 दिन हम इस दुनिया को छोड़ कर फिदा हो जाते हैं खत्म हो जाता है सब कुछ सब कुछ यहीं से हमने पाया होता है और यही सब छोड़ जाते हैं जो ब्रह्मांड में खड़ा क...
कहते हैं वहां पर बहुत मुश्किल से मिलती है मोहब्बत अगर मिल जाए तो समझती नहीं है इसलिए कोशिश करनी चाहिए मोहब्बत को ज्यादा जोर से मत पकड़ो और ढील भी मत दो क्योंकि ढील देने से वह बिछड़ जाती है और कस के पकड़ने से घायल हो जाती है तो प्रेम को बस प्रेम से सहेजे रखो  लेकिन उसने तो डील भी नहीं दी और कस कर भी नहीं पकड़ा फिर ऐसा क्या हुआ और फिर एक बार बिछड़ जाए दूर चला जाए फिर का मिलना मुश्किल है तभी तो उसके जाते ही मौसम बहुत खराब हो गया था  मुझसे मिलने के लिए आया वे लेकिन मौसम को शायद मंजूर नहीं था और उसका मिलना संभव नहीं हो पाया  हाथों से भगवान पर ही सहारा था अगर वह मिला ही नहीं तो मिल जाएगी नहीं तो हमारी कोई भी कोशिश काम नहीं आने वाली क्योंकि प्यार मोहब्बत इश्क इश्क किस्मत से मिलते हैं यह किस्मत के खेल होते हैं   कितनी ही दिन गुजर गए ना तो उसमें जॉब शुरू की और ना ही उसने थिएटर ज्वाइन किया हां बस कोचिंग क्लास जरूर शुरू कर दिए थे  अब बस एक यही ख्वाब रह गया था कि किसी तरीके से कंपटीशन निकालना है और किस डिपार्टमेंट में सरकारी ऑफिसर की जॉब करनी है 
तुम जो कहते हो लिखते हो या सोचते भी हो सब समझ आ जाती है मुझे तुम्हारी हर बात सुनो ज़ब तुम सांस भी लेते हो या छोड़ते हो मुझे पता चल जाता है इसलिए कभी कोशिश मत करना तुम मुझे किसी भी तरह से समझाने बुझाने की क्योंकि मैं कहती हूं तुम्हारी नस नस में लहू बनकर...

सजा

 तुम्हारी बातों से मन सुखी हो जाता है तुम्हारी बातों से मन दुखी हो जाता है  जब मन है मेरा तो मेरी बातों से सुखी होना चाहिए मेरी बातों से दुखी होना चाहिए तुम्हारी बातों से क्यों हो तुम अगर मेरे होते तो तुम मुझे दुख नहीं देते कभी दुख देने की कोशिश नहीं करते मुझे बार बार धोखा नहीं देते  हो सकता तो सुख देते लेकिन तुम हमेशा मुझे एक नया दुख खोज कर देते हो और मैं उस दुख में डूबी रहती हूं  गम में गहरे उतर जाती है कोशिश करती हूं निकलने की बहुत भयंकर कोशिश करती हूं तो कभी उस दुःख से बाहर निकल आती हूं तो कभी उस दुःख से निजात पा जाती हूं लेकिन सुनो मैं कभी मुस्कुरा नहीं पाती भूल गयी हूँ मैं जैसे मुस्कुराना और इसका कारण हो तुम तुम मेरे दोषी हो तुम्हें क्या सजा दूँ मैं यही सजा कि तुम भी इन दुखों में मेरे सहभागी बने रहो.... सीमा असीम 26,2,21
 चांद को देखना एक तक देखते जाना  घटते बढ़ते और 16 कलाओं से परिपूर्ण होते जाना   कितना सरल है ना  चांद को देखना  चांद की पवित्र चांदी में नहाई  धरती पर अपनी परछाई को  पकड़ने की कोशिश करना छोटी बड़ी आड़ी तिरछी लंबी नाटी  परछाई को पकड़ कर अपने गले से  लगाने की कोशिश करना सरल है ना परछाई को नापना  इतना ही सरल तो है बस तुम्हें पढ़ना और सिलसिलेवार लिखते चले जाना चाँद का आसमां में मुस्कुराना सीमा असीम 23,2,21