खुशियाँ
जब अपने हो साथ
जब अपने साथ होते हैं तो
हमें मिल जाती हैं अनगिनत खुशियाँ
सुख और शांति
छोटी छोटी प्यारी प्यारी अपनों की बातें
हमें यादगार पलों से नवाज़ देती हैं
जब कभी तेज हवाएँ चलती हैं तो
मन घबरा जाता है
लेकिन यही हवाएँ हमें मंजिल का पता देती हैं
धीरे धीरे गुजर जाता है वक्त
हम सोचते रह जाते हैं
कभी इसमें व्यस्त
कभी उसमें लगे हुए
दुनिया की रस्में निभाते हुए
भूल जाते हैं खुद को
अपने सपने
अपनी उम्मीदें
सब कर देते हैं दरकिनार
जीवन जी ही नहीं पाते और
न अपने लिए कभी कुछ कर पाते हैं
मन की खुशी क्या है कभी जान ही नहीं पाते
कभी तुम सोचना अपने लिए भी
अपनी खुशियों के लिए भी
कि सच क्या है
झूठ क्या है और
क्या है जीवन को जीने का सच्चा अर्थ ॥
सीमा असीम
7, 10, 20

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