कितना स्वार्थी होता है इंसान अपने स्वार्थ के लिए कितना नीचे गिरता है वह भी नहीं देखता कि सामने वाले को ऐसे कितनी तकलीफ हो रही होती है लेकिन जो स्वार्थी इंसान है उसे क्या फर्क पड़ता है वह तू अपने स्वार्थ के लिए ही सब कुछ करता है गिरता है चाहे कुछ भी करता है वह अपने स्वार्थ पूर्ति कर ही देता है स्वार्थी इंसान का कोई जमीर नहीं होता उसके मन में कोई इंसानियत नहीं होती प्रेम की कोई भावना होती है ना किसी के दर्द या दुख से उसे कोई मतलब होता है तू जीता है सिर्फ अपने लिए और अपने लिए ही मर जाता है अपने सुख के लिए वह नए नए रास्ते तलाश था है और उन्हीं रास्तों पर चलता है जिससे सुख मिलता है वह उधर ही जाता है और जिन रास्तों पर वह चलता आया है उन रास्तों पर देखता भी नहीं है क्योंकि वह स्वार्थ पूर्ति कर चुका होता है और उस रास्ते पर जाकर उसे कुछ इतना खास मिलने वाला नहीं होता है स्वार्थी इंसान कभी अपना नहीं हो सकता उसे चाहे आप अपना बनाने के दाग कोशिश करो वह कभी नहीं होगा तुम्हारा कभी नहीं होगा

 एक सच्चा इंसान वह सिर्फ तुम्हारा ही रहता है सिर्फ तुम्हारा वह दूसरी तरफ कभी नजर में नहीं डालता उसका ध्यान तक नहीं जाता वह सिर्फ उस रास्ते पर चलता है जो सच्चा है और सही है जिसने उसे अपना पूरा समर्थन किया है जिसने सिर्फ उसे अपना माना उससे उसी को ही अपना सबकुछ समर्पित कर देता है फिर उसका ध्यान कभी इधर उधर नहीं भटकता है एक सच्चा इंसान सिर्फ आपका होता है जिस तरह से सिर्फ आप उसकी होते हो

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