दर्द
दिल भर भर के आता है
आंखों से आंसू बहाता है
न जाने क्यों तू मझे इस कदर
बेतरह तड़पाता है.
इस तरह खींचते हैं प्राण
मानो जान निकल जाएगी
आत्मा भी इस तरह तड़पती है
नस नस भी दर्द से खड़कती है
दर्द का कोई ना होता है और छोर
बेदर्दी तुझे भी यूँ दर्द
तो एहसास तो होगा
तू झूठा ही सही
तुझे मुझसे सच्चा प्यार होगा
तेरी हर बात से छल छलकता है
तेरे हर शब्द में स्वार्थ भरा है
लूट लेता है पूरी तरह से रस पूरा निचोड़ देता है
आता है मीठी मीठी बातें बनाता है
इसी बात पर भी भड़क जाता है
गलत को गलत कहो कैसे कहोगे भला
उसे तो बस अपनी तारीफ करवाना ही पसंद आता है
एक दिन जब याद करेगा अपनी मनमानियां
तो पछतायेगा
बहुत पछताएगा
बेदर्दी देखना एक दिन तू मेरे प्यार को तरस जाएगा
सीमा असीम
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