जब हम तो के सागर में गोते लगा रहे होते हैं और हम बेतहाशा आंसू बहा रहे होते हैं उसमें हमारा मन चाहता है कि कोई हमारे सर पर हाथ से राय कंधे थपथपाई पीठ सहला आए और अपने गले से लगा कर कहीं मत रो मत रो मैं हूं ना तुम्हारे साथ लेकिन तब हमारे आस पास ऐसा कोई नहीं होता जो हमें समझा सके हमें बहला सके हमारे दुख को दूर कर सके और यह दुख हमें होते क्यों है इसलिए होते हैं कि हम जिस पर बहुत विश्वास करते हैं बेतहाशा विश्वास करते हैं और वह हमारे विश्वास को तोड़ देता है हम फिर उस पर विश्वास करने लगते हैं पुरानी बातों को भूल कर फिर वह हमारा विश्वास तोड़ देता है और बार-बार वह हमारा विश्वास तोड़ता है हम अपने विश्वास की टूटने पर दुखी होते हैं किसी अपने के द्वारा विश्वास तोड़ने पर दुखी होते ना जाने वह कैसे सोचता होगा ना जाने उसके मन में क्या होता होगा ना जाने वह ऐसे क्यों करता होगा जो हमारा अपना है वह हमें क्यों चूर-चूर कर बिखेर देना चाहता है क्यों हमारे दुख को बढ़ा देना चाहता है क्यों हमें इतना कष्ट देना चाहता है मुझे नहीं पता नहीं पता नहीं पता हम तो सिर्फ आंसू बहाते हैं और अपने दर्द में डूब जाते हैं...
मुस्कुराना
कितना अच्छा लगता है सुबह सुबह सूरज का निकलना पंछियों का चहकना फूलों का खिलना और रोशनी का बिखर जाना रात के अंधेरे को मिटाते हुए जब रोशनी होती है तो मन खुशी से प्रफुल्लित होता है बहुत अच्छा लगता है मुझे दुनिया को रोशनी में देखना मुझे नहीं पसंद अंधेरा नहीं पसंद मुझे मुरझाना नहीं पसंद मुझे रोशनी का कम हो जाना लेकिन सुनो इस सब से भी ज्यादा अच्छा लगता है मुझे तुम्हारा मुस्कुराना तुम्हारा मुझ से बतियाना....... सीमा असीम 3, 10, 20
Comments
Post a Comment