हमारा बरेली 

 इतिहास के पन्नों पर अगर देखा जाए तो हमारा बरेली महाभारत काल में पांचाल देश के नाम से जाना जाता था क्योंकि द्रोपदी का जन्म यहां पर हुआ था और द्रौपदी की जन्म स्थली हमारा बरेली ही था महाभारत काल में राजा द्रुपद यही राज करते थे, दरअसल द्रौपदी की जन्म स्थली बरेली थी और वह पांचाली कही जाती थी क्योंकि वो पांच पतियों की पत्नी थी इस वजह से बरेली को पांचाल प्रदेश भी कहा जाता था... 

सीमा असीम 

 बरेली कॉलेज की स्थापना 1837 में  हुई थी और उस समय ब्रिटिश हुकूमत थी,  18 57 में ज़ब क्रांति का बिगुल बजा तो रुहेलखण्ड  में इस आंदोलन की बागडोर रोहिल्ला सरदार खान बहादुर खान के हाथों में थी उनकी अगुवाई में क्रांतिकारी अंग्रेजों से लोहा ले रहे थे बरेली कॉलेज का शिक्षक मौलवी महमूद हसन और फारसी शिक्षक कुतुब शाह समेत तमाम छात्र इस आंदोलन में शामिल हुए थे कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ कार्लोस बक को क्रांतिकारियों ने मौत के घाट उतार दिया था

सीमा 

 औरंगजेब के शासनकाल के दौरान और उसके बाद भी उसकी मृत्यु के बाद भी बड़े बरेली और उसके आसपास के क्षेत्र में अफगान बस्तियों को बसा बसाया जाता था इनफ गानों को रोहिल्ला अफगान ओके के नाम से जाना जाता था इस कारण इस क्षेत्र को रोहिलखंड नाम मिला निक्की बरेली और बरेली के आसपास के क्षेत्र को रूहेलखंड कहा जाने लगा

 सीमा

 रुहेलखंड के द्वितीय नवाब बहादुर खान जोहिला थे उन्होंने उन 18 सो 57 की क्रांति के दौरान अंग्रेजों का विरोध किया बरेली से अंग्रेजों को खदेड़ने में सफलता हासिल की लेकिन वह कामयाब नहीं हुआ इसके बाद बरेली समेत पूरे रुहेलखंड पर अंग्रेज काबिज हो गए खान बहादुर खान स्मारक आज भी जिला जेल के बाहर बना हुआ है

 सीमा असीम

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