जो चोट तुमने और तुम्हारी आदत ने मिलकर मेरे मन को पहुंचाई है उसकी भरपाई कौन करेगा? मेरे अंतस को मेरी आत्मा को घायल और जख्मी किया है उस का न्याय कब होगा? नीचा दिखाना, अपमानित करना और हर हाल में बुरा चाहना, उसको कौन देखेगा, कौन समझेगा? सिर्फ अपना सोचना अपने बारे में बात करना अपने लिए ही कुछ करना ऐसे कैसे चलेगा ऐसे कैसे चलेगा ऐसे कैसे मिलेगा एक तरफा एक तरफा एक तरफा......
मुस्कुराना
कितना अच्छा लगता है सुबह सुबह सूरज का निकलना पंछियों का चहकना फूलों का खिलना और रोशनी का बिखर जाना रात के अंधेरे को मिटाते हुए जब रोशनी होती है तो मन खुशी से प्रफुल्लित होता है बहुत अच्छा लगता है मुझे दुनिया को रोशनी में देखना मुझे नहीं पसंद अंधेरा नहीं पसंद मुझे मुरझाना नहीं पसंद मुझे रोशनी का कम हो जाना लेकिन सुनो इस सब से भी ज्यादा अच्छा लगता है मुझे तुम्हारा मुस्कुराना तुम्हारा मुझ से बतियाना....... सीमा असीम 3, 10, 20
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