जो चोट तुमने और तुम्हारी आदत ने मिलकर मेरे मन को पहुंचाई है उसकी भरपाई कौन करेगा? मेरे अंतस को मेरी आत्मा को घायल और जख्मी किया है उस का न्याय कब होगा? नीचा दिखाना, अपमानित करना और हर हाल में बुरा चाहना, उसको कौन देखेगा, कौन समझेगा? सिर्फ अपना सोचना अपने बारे में बात करना अपने लिए ही कुछ करना ऐसे कैसे चलेगा ऐसे कैसे चलेगा ऐसे कैसे मिलेगा एक तरफा एक तरफा एक तरफा......
चांद को देखना एक तक देखते जाना घटते बढ़ते और 16 कलाओं से परिपूर्ण होते जाना कितना सरल है ना चांद को देखना चांद की पवित्र चांदी में नहाई धरती पर अपनी परछाई को पकड़ने की कोशिश करना छोटी बड़ी आड़ी तिरछी लंबी नाटी परछाई को पकड़ कर अपने गले से लगाने की कोशिश करना सरल है ना परछाई को नापना इतना ही सरल तो है बस तुम्हें पढ़ना और सिलसिलेवार लिखते चले जाना चाँद का आसमां में मुस्कुराना सीमा असीम 23,2,21
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