जो चोट तुमने और तुम्हारी आदत  ने मिलकर मेरे मन को पहुंचाई है उसकी भरपाई कौन करेगा?  मेरे अंतस को मेरी आत्मा को घायल और जख्मी किया है उस का न्याय कब होगा?  नीचा दिखाना,  अपमानित करना और हर हाल में बुरा चाहना, उसको कौन देखेगा, कौन समझेगा?  सिर्फ अपना सोचना अपने बारे में बात करना अपने लिए ही कुछ करना ऐसे कैसे चलेगा ऐसे कैसे चलेगा ऐसे कैसे मिलेगा एक तरफा एक तरफा एक तरफा...... 

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