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 चाहा है तुमको सनम सिर्फ तुमको ही चाहेंगे इन ज़िंदगी की राहों में तन्हां  बसर हुई। ..  सुनो           सच    तो यही है न कि अपनी जान की कभी परवाह ही नहीं की  मैनें सिर्फ सिर्फ तुम और  सिर्फ तुम  ही रहे  मेरे जीवन में लेकिन  बड़ा  दुःख और दर्द होता है कि मैं सबकुछ जान कर  समझ  भी मासूम ही बनी रही  और तुम्हें पहले सी शिद्दत से ही चाहती रही ,,,अपनी आँखें ,कान ,नाक सब बंद कर ली कि न कुछ देख सकूँ न सुन सकूँ और न ही खुशबु ले सकूँ ,,,, इतना सच्चा  होने पर भी  तुम्हें कोई फर्क नहीं कमाल है कहते हैं न इंसान की आदतें कभी नहीं बदलती , खैर  मुझे  क्या , मेरे कर्म  मेरे साथ और तुम्हारे कर्म तुम्हारे साथ , हमेशा ख़ुशी दी है और देती भी रहूंगी हमेशा दुआ दी है और देती भी रहूंगी ,हमेशा अपने शब्दों में दिल में जीवन में शामिल रखा और रखूंगी भी , प्रिय शायद कभी कभी तुम्हें भी मेरे दुःख या दर्द का अहसास होता होगा। . क्या पता ,,,,,एक गहरी साँस। ..यह कैसी दू िया है यह कैसा प्रेम ...
 न कोई गिला है तुमसे न कोई खता है तुम्हारी कुछ गलत है तो सिर्फ इतना मैनें वफ़ा की तुमसे ईमानदारी और सच्ची के साथ हाँ प्रिय सुनो , तुम्हारी कोई गलती नहीं है अगर कुछ भी गलती है तो यही कि मैनें तुम्हें सच्चे दिल से चाहा और पूरी ईमानदारी से रिश्ता निभाया , सिर्फ तुम्हारी ही होकर रह गयी और पूरी दुनिया को भुला दिया , सोचा तक नहीं किसी और के बारे में न ही कभी ख्याल ही गया बस दुःख  कभी कभी कि जो वफ़ा जो ईमानदारी मैनें रिश्ते में निभाई वो तुम कायम क्यों नहीं रख सके ,क्यों डगमगा गए तुम ? क्यों भटके ? किस चाह में ? ऐसी कौन सी ख्वाहिश थी सनम जो मैनें पूरी नहीं की ,या मैंने तुम्हारी बात नहीं मानी खैर क्या कहूं मैं तुम्हें। ..क्योंकि तुम्हें कुछ कहना खुद को ही ऊँगली दिखाना है ,मैं बस  कहना चाहती हूँ आज खुद से ही कि तुम मेरे हो सिर्फ मेरे क्योंकि यही सच है अब और यही मेरा विश्वास भी है , ! अगर मैं पूरी तरह से ईमानदार हूँ औरा अपने मन का विश्वास पक्का बनाये रखती हूँ तो फिर दुनिया की कोई भी ताकत हमें एक दूसरे से जुदा  नहीं कर पाएगी और न ही तुम कभी मेरे विश्वास को धोखा दे पाओगे। ..स...
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 आज  इस कदर याद आई तुम्हारी कि अश्क आँखों से बहते ही रहे ! सुनो प्रिय ,           आज न जाने क्यों बारिश की तरह मेरी  आँखें  बरसती  रही हालाँकि हर तरफ तेज धूप थी मानों यूँ आग सी चारो तरफ घिरी  हुई थी और मैं उसके बीच में  विरह जलन  से जल जल कर ख़ाक होती हुई फिर  जली और न ही और  ही कुछ बची, बस यह समझ लो जैसे बिन पानी की तड़पती हुई मछली की तरह मैं नैनो से गिरते हुए नीर के सागर में डुबकियां लगाकर आग के  गोले में डूब गयी ,,,,  मेरे सनम न तो ममुझे अब उबरने की   खबर है और न ही गहराई में उतर जाने की कि सुध बुध सब गवा दी है मैंने ,सच में नहीं जानती मैं कि तुम मेरे साथ कैसा व्यव्हार कर रहे हो या कैसे अपनी प्रीत निभा रह हो कितने सच हो या कितने झूठ यह भी जानने  की   ख्वाहिश नहीं है बस इतना जानती हूँ  मैं अगर तुम मेरे साथ जरा सा भी गलत करोगे ईश्वर तुम्हारे साथ दसगुना गलत करेगा , तुम्हारे लिए मेरे मन में हमेशा ही बहुत प्रेम था और रहेगा लेकिन तुम्हारी गलतियों पर गलतियां द...
मैं लिख देती हूँ अपनी  ही तकदीर अपने ही हाथों से अय सनम तुझे मैं रज रज के रचती हूँ हीरे की तरह सुनो सनम         आज बड़े दिनों के बाद तुम्हें लिखने बैठी हूँ तो जी चाहता है कि वो एक एक बात लिख दूँ जो तुम्हारे मन को  ख़ुशी दे , सकूँ दे , करार दे और मन को फूलों की तरह हल्का फुल्का और सहज कर दे। ....  लेकिन मैं अपने दुखी दिल से तुम्हें ऐसा कैसे  दे  सकती हूँ कि रात रात भर जाग जाग कर तड़पती हूँ ,इतने अश्क आँखों से बहाती हूँ कि नदियां समुन्दर सब भर जाए और इतनी  जोर जोर से तुम्हें अपनी अंतरात्मा से  पुकारती हूँ कि क्षीर सागर में विश्राम करते विष्णु भगवन  चौंक कर जग जाए और मां लक्ष्मी घबरा उठे  सनम यह सच्चे प्रेम की पुकार है , तड़प और बेचैनी है जो तुम शायद समझ सको सनम तेरे सिवाय और कोई भी मेरा नहीं सिर्फ तुम और सिर्फ तुम ही मेरे सबकुछ हो , जान सको तो जान लेना ,  वैसे सच तो यही है कि  तुम मेरे मन की एक एक बात समझ जाते हो जो मैं तुमसे कहती भी नहीं हूँ और चाह कर भी कह नहीं पाती हूँ क्योंकि मुझे तुम्हार...
दिल भर भर आता है औ आंसू छलक छलक  जाते हैं तेरी याद में सनम तेरे  दर्द में सनम जी नहीं पाते हैं सुनो प्रिय तुम किस तरह से मेरे बिना जी लेते हो  मेरी याद  है कैसे तुम्हारा दिल नहीं धड़कता है कैसे तुम तक मेरी आवाज नहीं जाती है ,,,बोलो न सनम बताओ न मुझे सनम , वो कौन सी तरकीब है ,  वो कौन सी विद्द्या है जिसे तुमने अपने जीवन में उतार लिया  और सुख से  जी  लेते हो या शायद तुम भी मेरी ही तरह से परेशान रहते हो ,मेरी ही तरह से दुखी होते हो  ही तरह से आंसू बहाते हो , मुझे लगता है जैसी मेरी हालत होती है तुमसे दूर रहकर वैसी ही तुम्हारी भी होती होगी क्योंकि दिल से दिल को राह होती है और जैसा हम सोचते हैं वैसा ही सामने वाला सोचता है लेकिन सनम चाहे जो भी हो सही या गलत झूठ या सच मुझे कुछ नहीं पता न दुनियादारी का पता है मालूम है तो सिर्फ इतना कि मैं तुम्हारे प्रेम में हहूँ सिर्फ तुम्हारी और तुम्हारे प्रेम में भले ही दुनियां की कितनी भी मुश्किलें हमारे रास्ते में आये मैं कभी भी पीछे नहीं हटूंगी और न ही कभी डरूंगी सिर्फ तुम्हारी होकर मैं सिर्फ तुम...
  तुम्हें चाहूँ तुम्हें पूजूँ और तुम्हें ही प्यार करूँ  अय सनम तेरे लिए तो जां भी निसार करूँ !! सुनो प्रिय ,  आज का दिन अच्छा बीत गया, बस नींद आयी तो  तुम्हारा ख्याल आया और ना जाने क्यों  दिल घबराने लगा फिर नींद नहीं आयी ,  सनम  यह मेरा प्रेम ही  तो है जो मुझे एक पाँव से नाचने को मजबूर कर देता है घुमाता रहता है चकरघिन्नी की तरह ,!! जैसे घूमती रहती है   पृथ्वी गोल गोल, ऐसे ही मेरा मन भी तुम्हारे चारो और परिक्रमा करता रहता है और मन ही मन तुम्हारा नाम जपता रहता है जैसे कोई मंत्रोचार हो रहा हो ,!       सोचने लगती हूँ कि तुम्हें न जाने कब मिल पाऊँगी, न जाने कब तुमसे दिल की बात कह पाऊँगी,!  नहीं जानती मैं बस इतना पता है कि तुम्हें मैं अपने मन से पल भर को भी दूर नहीं कर सकती हूँ और जब जरा किसी अन्य काम में व्यस्त हो जाती हूँ तभी अचानक से दिल घबरा जाता है और मैं  बेक़रार हो जाती हूँ ! न जाने यह प्रेम का कौन सा रूप है,  या कौन सी चाह है यह सब जानने  में असफल हूँ मैं ,सच में असफल !...
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सोचती हूँ तुम्हें बस सोचती रह जाती हूँ कि प्रेम करती हूँ मैं तुम्हें जान से जयादा ! सुनो प्रिय               यह सच है कि तुम सिर्फ मेरे हो लेकिन सनम यह मेरे दिल को क्या हो जाता है क्यों मन में गलतफहमियां   पल जाती है फिर चाहें तुम मुझे लाख समझा दो या मैं खुद ही अपने मन को समझा दूँ दिल समझता  ही नहीं है ,,,आज जब तुमसे बात की तो लगा  कि  हमारे मन में तो तुम्हारे लिए सिर्फ प्रेम है और कुछ भी नहीं मैं सिर्फ तुम्हारी हूँ प्रिय जैसी भी हूँ या जो कुछ भी हूँ सिर्फ तुम्हारी , हाँ इतना  कि मैं एकदम से सच्चे मन से ही हमारा  निभाऊंगी , हर कष्ट को अकेले  सह कर भी अब तुमसे  कोई शिकवा या शिकायत  करुँगी क्योंकि  हूँ कि तुम मेरे हो सिर्फ मेरे  और रहोगे भी, पता है   प्रिय ऐसा लगता है मुझे कि   मेरी आँखों में कोई नदी बस गयी है जो जब देखो तब   बह जाने को आतुर  जाती  है  जो मेरे लाख कोशिश करने पर भी रूकती या थमती नहीं है। ...न जाने  कहा...